क्रिकेट

जीत के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानी पत्रकार को दिखाई उसकी असली जगह-WATCH VIDEO

टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एशिया कप 2025 खिताब जीतने के बाद एक पाकिस्तानी रिपोर्टर को उसकी जगह दिखाई। भारत ने एक रोमांचक मैच में पाकिस्तान को हराकर एशिया कप टूर्नामेंट को नौवीं बार जीता।

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टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव (फोटो -वीडियो स्क्रीनग्रैब)

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एशिया कप 2025 फाइनल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम इंडिया के बारे में सवाल पूछने के लिए एक पाकिस्तानी रिपोर्टर को उसकी जगह दिखाई और उसे चुप करा दिया। पाकिस्तानी रिपोर्टर ने सूर्यकुमार और उनकी टीम से पाकिस्तान टीम को नजरअंदाज करने को लेकर कई सवाल किए। पाकिस्तानी पत्रकार ने जब सूर्यकुमार यादव से सवाल किया तो उन्होंने इसका मजेदार जवाब दिया। सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानी रिपोर्टर को अपने जवाब से शांत कर दिया।

पाकिस्तानी रिपोर्टर ने भारतीय टीम के व्यवहार को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने हाथ मिलाने और फोटोशूट करने से मना कर दिया और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री से ट्रॉफी भी नहीं ली। इसपर सूर्यकुमार यादव ने मुस्कुराते हुए पूछा- गुस्सा हो रहे हो आप? दरअसल पाकिस्तानी टीम के हारने के बाद पाकिस्तानी पत्रकार की बौखलाहट भी साफ दिख रही थी और उसने एक साथ कई सवाल कर सूर्यकुमार को घेरने की कोशिश की लेकिन सूर्यकुमार ने मजेदार जवाब देकर उसे चुप कार दिया।

गौर हो कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव एशिया कप से मिलने वाली पूरी मैच फीस भारतीय सशस्त्र बलों और पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों को दान करेंगे । भारत ने रविवार को पाकिस्तान को पांच विकेट से हराकर एशिया कप जीता । भारतीय खिलाड़ियों को टी20 प्रारूप में हर मैच में चार लाख रूपये मिलते हैं यानी टूर्नामेंट के सात मैचों के लिये सूर्यकुमार को 28 लाख रूपये मिलेंगे । भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया ।

सूर्यकुमार ने 14 सितंबर को पहले ग्रुप मैच में पाकिस्तान पर मिली जीत को पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों और भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित किया था । पाकिस्तान ने उन पर राजनीतिक बयान देने का आरोप लगाकर आईसीसी से शिकायत दर्ज कराई थी और उन पर प्रतिबंध की भी मांग की थी । आईसीसी ने उन पर उस दिन की मैच फीस का 30 प्रतिशत जुर्माना लगाकर आइंदा ऐसे बयानों से बचने के लिये कहा था । बीसीसीआई ने उन पर लगाये गए जुर्माने के खिलाफ अपील की है चूंकि सूर्यकुमार ने आईसीसी सुनवाई के दौरान कहा था कि वह निर्दोष हैं ।

(भाषा इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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