अध्यात्म

Biggest Shivling In The World: सिद्ध है बिहार के विराट रामायण मंदिर में स्थापित शिवलिंग, जानिए क्या हैं इस शिवलिंग की विशेषताएं

Ramayan Mandir Shivling Kyu Khas hai : बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। 17 जनवरी को यहां दुनिया के विराट शिवलिंग की स्थापना हुई है। एक ही पत्थर से बने इस शिवलिंग को बेहद ही दुर्लभ और सिद्ध स्वरूप माना जा रहा है। इस एक विराट शिवलिंग में 1000 छोटे-छोटे शिवलिंग स्थापित हैं। आइए जानते हैं कि इस शिवलिंग की और क्या विशेषताएं हैं।

विराट शिवलिंग की क्या है खासियत

विराट शिवलिंग की क्या है खासियत?

Ramayan Mandir Shivling Kyu Khas hai : बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित विराट रामायण मंदिर एक बार फिर देश-दुनिया की नजरों में आ गया है। 17 जनवरी 2026 को यहां दुनिया के सबसे बड़े 33 फीट ऊंचे अखंड शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। यह सिर्फ एक स्थापत्य उपलब्धि नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, आस्था और साधना का अद्भुत संगम है। ब्लैक ग्रेनाइट के एक ही पत्थर से निर्मित यह शिवलिंग अपनी भव्यता के साथ गहरे आध्यात्मिक अर्थ भी समेटे हुए है।

बेहद विशेष है ये शिवलिंग

सनातन धर्म में शिवलिंग को सृष्टि की उत्पत्ति, संरक्षण और संहार के प्रतीक के रूप में माना जाता है। अखंड शिवलिंग का अर्थ है ऐसा शिवस्वरूप जो एक ही शिला से निर्मित हो, बिना किसी जोड़-तोड़ के हो। इसे पूर्णता, अखंड चेतना और अविच्छिन्न ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। विराट रामायण मंदिर में स्थापित यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है, जिसका वजन करीब 210 मीट्रिक टन है। एक ही पत्थर से बने होने के कारण इसे विशेष रूप से दुर्लभ और सिद्ध स्वरूप माना जा रहा है।

एक में हैं हजार शिवलिंग

इस विशाल शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 1008 सहस्त्रलिंगम उत्कीर्ण हैं। अंक 1008 को सनातन परंपरा में पूर्णता और आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सहस्त्रलिंगम के दर्शन मात्र से ही हजार शिवलिंगों के पूजन का फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि यह शिवलिंग साधकों, भक्तों और तीर्थयात्रियों के लिए विशेष पुण्यदायी माना जा रहा है।

कहां स्थित है दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग

यह सहस्त्रलिंगम बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया (जानकी नगर) स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। यह क्षेत्र पहले से ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और अब यह शिवभक्ति का एक नया वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है।

इस शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम क्षेत्र में किया गया, जो प्राचीन काल से शिल्पकला का केंद्र रहा है। शिल्पकार हेमलता देवी की देखरेख में वर्षों की तपस्या और साधना के साथ इसे आकार दिया गया। करीब 10 वर्षों में तैयार हुआ यह शिवलिंग केवल पत्थर की आकृति नहीं, बल्कि शिल्पकारों की श्रद्धा और साधना का जीवंत प्रमाण है।

45 दिनों का यात्रा के बाद पहुंचा है बिहार

तमिलनाडु से बिहार तक इस शिवलिंग की यात्रा अपने-आप में ऐतिहासिक रही। करीब 2565 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गुजरकर यह 45 दिनों में बिहार पहुंचा है।

क्यों विशेष है विराट रामायण मंदिर?

विराट रामायण मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक विशाल आध्यात्मिक परिसर है। यह लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा है। मंदिर की कुल लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। इसमें 18 शिखर और 22 मंदिर प्रस्तावित हैं। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी, जो इसे विश्व के सबसे ऊंचे मंदिर परिसरों में शामिल करेगी।

यह मंदिर भगवान राम की कथा और शिव-राम की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक माना जा रहा है। शिवलिंग स्थापना के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन यह संकेत देता है कि विराट रामायण मंदिर आने वाले समय में न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी बिहार को नई पहचान देगा।

जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों का वार्षिक राशिफल। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

End of Article