अध्यात्म

दशहरा क्यों मनाया जाता है? जानें इस पर्व को मनाने का पौराणिक कारण

why do we celebrate Dussehra (हम दशहरा क्यों मनाते हैं, जानें दशहरा क्यों मनाया जाता है): दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई का जीत का प्रतीक है। इसको विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि इस पर्व का क्या महत्व है।

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क्यों मनाते हैं दशहरा? (pic credit- canva)

why do we celebrate Dussehra (हम दशहरा क्यों मनाते हैं, जानें दशहरा क्यों मनाया जाता है): विजयादशमी या दशहरा असत्य पर सत्य की विजय का प्रमाण है। यह पर्व हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने दुष्ट राक्षस लंकापति रावण का वध किया था और पूरी दुनिया को उसके आतंक से मुक्त किया था। इसके साथ ही इसी दिन माता दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षस का वध किया था। इस कारण यह पर्व अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आज 2 अक्टूबर को दशहरे का पर्व मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं कि यह पर्व क्यों मनाया जाता है?

हम दशहरा क्यों मनाते हैं?

रामायण के अनुसार, लंकापति रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। भगवान श्रीराम ने अपनी सेना और भक्त हनुमान, सुग्रीव जैसे सहयोगियों के साथ लंका पर आक्रमण किया। नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद, दशमी तिथि को श्रीराम ने रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराने के साथ ही संपूर्ण पृथ्वी को उसके आतंक से बचाया। इस कारण हम हर साल दशहरा का पर्व मनाते हैं। जो सत्य, धर्म और न्याय की जीत का उत्सव है।

दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार, माता दुर्गा ने नौ दिनों तक राक्षस महिषासुर से युद्ध किया और दशमी के दिन उसका वध किया। महिषासुर को ब्रह्मा से वरदान प्राप्त था कि उसे कोई पुरुष नहीं मार सकता, लेकिन माता दुर्गा ने अपनी दिव्य शक्ति से उसका अंत किया। यह कथा नारी शक्ति और धर्म की विजय को दर्शाती है। नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा की पूजा के बाद दशहरा उनके विजय उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

अलग-अलग तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है ये उत्सव

दशहरा का ये उत्सव भारत में अलग-अलग तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है। आइए जानते हैं कहां कैसे मनाया जाता है दशहरे का उत्सव?

रावण दहन

उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और पंजाब में दशहरा पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। यह रावण की बुराई पर श्रीराम की जीत का प्रतीक है। रामलीला का आयोजन भी इस अवसर पर होता है, जिसमें भगवान राम की कथा को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

शस्त्र पूजा और विजय उत्सव

दक्षिण भारत, विशेष रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु में, दशहरा पर शस्त्र पूजा की परंपरा है। यह परंपरा क्षत्रियों और योद्धाओं द्वारा युद्ध उपकरणों की पूजा करने से जुड़ी है, जो विजय की कामना का प्रतीक है। मैसूर का दशहरा अपने भव्य जुलूस और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हालांकि उत्तरभारत में भी शस्त्र पूजा का चलन है।

नवरात्रि का समापन

नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा की पूजा के बाद दशहरा को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग माता दुर्गा को विदा करते हैं और उनके विजय उत्सव में शामिल होते हैं। बंगाल, ओडिशा और असम में दुर्गा विसर्जन इस दिन का मुख्य आकर्षण है।

दशहरा का आधुनिक महत्व

दशहरा का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यह हमें सिखाता है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें हों, सत्य और धर्म की राह पर चलने से जीत निश्चित है। यह पर्व हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर बुराइयों जैसे क्रोध, लालच और अहंकार को त्यागने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही, यह नारी शक्ति और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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