अध्यात्म

क्या है अनवसर काल, इस दौरान क्यों दर्शन नहीं देते भगवान जगन्नाथ

Jagannath Ji Anavasar Kaal Kya Hai : ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में दर्शन 15 दिनों के लिए बंद हो गए हैं। इस दौरान अनवसर काल शुरू हो गया है। आइए जानते हैं कि ये क्या है।

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भगवान जगन्नाथ 15 दिन दर्शन क्यों नहीं देते हैं

Jagannath Ji Anavasar Kaal Kya Hai : ओडिशा के पुरी में हर साल ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को 108 कलशों से स्नान कराया जाता है। इसको देव स्नान पूर्णिमा या स्नान यात्रा के नाम से जाना जाता है। इसके बाद प्रभु 15 दिनों के लिए बीमार हो जाने की लीला करते हैं। इस दौरान वे भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं। इन 15 दिनों के समय को अनवसर काल के नाम से जाना जाता है। इन 15 दिनों के बाद जगन्नाथ यात्रा निकाली जाती है।

क्या होता है अनवसर काल

अनवसर का अर्थ होता है 'दर्शन के लिए उपलब्ध न होना'। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ को ज्वर आ जाता है। इस कारण उन्हें विश्राम देने के लिए मंदिर के गर्भगृह में रखा जाता है और इस दौरान आम भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। इस समय भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विशेष देखभाल की जाती है। उन्हें औषधीय लेप लगाया जाता है और पारंपरिक तरीके से उपचार किया जाता है। इस दौरान भगवान को सामान्य भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि विशेष प्रकार के औषधीय पदार्थों से उनकी सेवा की जाती है।

कितने दिनों तक रहता है अनवसर काल

स्नान पूर्णिमा के बाद शुरू होने वाला अनवसर काल आमतौर पर लगभग 15 दिनों तक चलता है। इस अवधि में भगवान जगन्नाथ भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते हैं। इसके बाद भगवान स्वस्थ होकर नवयौवन दर्शन देते हैं। नवयौवन दर्शन के बाद भगवान की प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू होती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं।

क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान जगन्नाथ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान अपने भक्तों के दुख और कष्टों को स्वयं पर लेकर उनकी रक्षा करते हैं। इससे जुड़ी एक कथा भक्त माधव दास की भी है, जिसमें कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ ने अपने भक्त की सेवा की और उसके प्रारब्ध का 15 दिन का रोग स्वयं ले लिया था। इसी कारण भगवान हर वर्ष भक्तों की तरह बीमारी की लीला करते हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और भगवान को औषधीय काढ़ा, फलों का रस और विशेष लेप अर्पित किए जाते हैं। 15 दिनों के विश्राम और उपचार के बाद भगवान स्वस्थ होकर नवयौवन दर्शन देते हैं और इसके बाद विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होती है।

अनवसर काल में कैसे होते हैं प्रभु के दर्शन

अनवसर काल के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के मुख्य विग्रहों के दर्शन भक्तों के लिए बंद रहते हैं। इस अवधि में मंदिर के गर्भगृह के सामने पर्दा लगा दिया जाता है और भगवान के प्रतिनिधि स्वरूप पटचित्र के दर्शन कराए जाते हैं। मान्यता है कि इन 15 दिनों में भगवान जगन्नाथ पुरी के पास ब्रह्मगिरि स्थित अलारनाथ मंदिर में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार पर स्थित पतितपावन स्वरूप के दर्शन भी भक्त कर सकते हैं। इस दौरान दायता सेवकों द्वारा भगवान की गुप्त सेवा की जाती है और उन्हें औषधीय काढ़ा, फलों का रस व विशेष भोग अर्पित किया जाता है। 15 दिनों के विश्राम के बाद भगवान स्वस्थ होकर नवयौवन दर्शन देते हैं और इसके बाद विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ होता है।

क्यों खास है जगन्नाथ पुरी की यह परंपरा

जगन्नाथ पुरी की परंपराएं भगवान को जीवंत स्वरूप में मानने की भावना को दर्शाती हैं। यहां भगवान का स्नान, विश्राम, उपचार और फिर भक्तों को दर्शन देना एक विशेष धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। अनवसर काल केवल भगवान के विश्राम का समय नहीं है, बल्कि यह भक्तों के लिए धैर्य, भक्ति और भगवान के प्रति प्रेम को महसूस करने का अवसर भी माना जाता है। यही कारण है कि जगन्नाथ पुरी की यह परंपरा देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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