Weekly Festival List May 2026 : मई 2026 का दूसरा सप्ताह धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। 11 मई से 17 मई के बीच कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। इस सप्ताह बड़ा मंगल, अपरा एकादशी, गुरु प्रदोष व्रत, वृषभ संक्रांति, मासिक शिवरात्रि, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत जैसे बड़े पर्व मनाए जाएंगे। इन व्रत-त्योहारों का संबंध भगवान विष्णु, शिव, शनि देव और हनुमान जी की पूजा से माना जाता है। आइए जानते हैं इस सप्ताह पड़ने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट और उनका महत्व क्या है।
11 से 17 मई 2026 के व्रत-त्योहारों की लिस्ट
| तारीख | दिन | व्रत-त्योहार |
|---|---|---|
| 12 मई | मंगलवार | ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल |
| 13 मई | बुधवार | अपरा एकादशी |
| 14 मई | गुरुवार | गुरु प्रदोष व्रत |
| 15 मई | शुक्रवार | वृषभ संक्रांति, मासिक शिवरात्रि |
| 16 मई | शनिवार | शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, दर्श अमावस्या |
12 मई को दूसरा बड़ा मंगल
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त हनुमान मंदिरों में जाकर चोला चढ़ाते हैं, सुंदरकांड का पाठ करते हैं और भंडारे का आयोजन भी करते हैं। मान्यता है कि बड़ा मंगल पर हनुमान जी की पूजा करने से संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
13 मई को अपरा एकादशी (Apara Ekadashi)
वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम और गीता पाठ करना शुभ माना जाता है।
14 मई को गुरु प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat)
जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है तो उसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से विवाह, संतान और करियर से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं। शाम के प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है।
15 मई को वृषभ संक्रांति और मासिक शिवरात्रि
15 मई को सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है। इस दिन दान-पुण्य और सूर्य उपासना का विशेष महत्व रहता है। इसी दिन मासिक शिवरात्रि भी मनाई जाएगी। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि आती है। इस दिन भक्त रात्रि में भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करते हैं। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है।
16 मई को शनि जयंती
16 मई को शनि जयंती मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। इस दिन शनि मंदिरों में विशेष पूजा होती है। शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान लोग इस दिन शनि देव को सरसों का तेल, काला तिल और उड़द अर्पित करते हैं।
वट सावित्री व्रत और दर्श अमावस्या
16 मई को ही वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है।
इसके साथ ही दर्श अमावस्या भी रहेगी। अमावस्या तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण, दान और पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
