Vishwakarma Ji Ki Aarti: दिवाली के बाद विश्वकर्मा पूजा का विधान है। इस साल विश्वकर्मा पूजा का पर्व 13 नवंबर को मनाया जाएगा। भक्त इस दिन अपने काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, यंत्रों और मशीनों की पूजा करते हैं और उन्हें आराम देते हैं। जो लोग दिवाली के बाद विश्वकर्मा पूजा करते हैं उन्हें इस पूजा में फूल, टीका, मिठाई, कच्चे चावल, दीया और कलावा की जरूरत होगी। सबसे पहले विधि विधान विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें फिर अपने कार्यस्थल पर दीया जलाएं और काम में इस्तेमाल किए जाने वाली मशीनों या उपकरणों की पूजा करें। उपकरणों को तिलक लगाएं, फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन की पूजा में भगवान विश्वकर्मा की आरती जरूर करें।
Vishwakarma Ji Ki Aarti: विश्वकर्मा जी की आरती
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्रा का जग में, ज्ञान विकास किया॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दु:ख कीना॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
जब रथकार दम्पति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा...
