Vishwakarma Bhagwan Ki Aarti (विश्वकर्मा जयंती की आरती): विश्वकर्मा जयंती का त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है एक बार फरवरी में तो दूसरी बार सितंबर में। फरवरी में विश्वकर्मा जयंती माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल ये तिथि 10 फरवरी को पड़ी है। इस दिन भक्त भगवान विश्वकर्मा और श्री हरि विष्णु भगवान की विधि विधान पूजा करते हैं और साथ ही अपने काम में उपयोग होने वाली मशीनों की भी पूजा करते हैं। इस दिन की पूजा में विश्वकर्मा भगवान की आरती जरूर की जाती है। यहां देखें विश्वकर्मा जी की आरती के लिरिक्स।
Vishwakarma Bhagwan Ki Aarti (विश्वकर्मा जयंती की आरती)
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
सुख संपति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥
विश्वकर्मा भगवान की आरती के बाद उन्हें लड्डू का भोग जरूर लगाएं। इसके बाद सभी में प्रसाद बांटें और खुद भी इसे ग्रहण करें।
