Vishwakarma Jayanti February 2025 Date, Time, Puja Vidhi, Vrat Katha And Wishes In Hindi, Vishwakarma Jayanti Ki Shubhkamnaye In Hindi: वैसे तो विश्वकर्मा जयंती का त्योहार हर साल 16 या 17 सितंबर को मनाया जाता है। लेकिन कुछ जगहों पर ये पर्व माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भी मनाया जाता है। इस साल ये तिथि 10 फरवरी को पड़ी है। मुख्य रूप से माघ वाली विश्वकर्मा जयंती महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ मशीनों व उपकरणों की भी पूजा करते हैं। यहां आप जानेंगे विश्वकर्मा जयंती पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और बधाई संदेश।
विश्वकर्मा जयंती 2025 फरवरी तारीख और मुहूर्त (Vishwakarma Jayanti February 2025 Date And Time)
विश्वकर्मा जयंती इस साल 10 फरवरी को मनाई जाएगी।इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेंगे...
- 12:13 PM से 12:58 PM
- 02:26 PM से 03:10 PM
- 06:05 PM से 06:31 PM
विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं 2025 (Vishwakarma Jayanti Wishes In Hindi)
-विश्वा विश्वकर्मा प्रभु मेरे,
हो प्रसन्न हम बालक तेरे,
आप सदा रहें इष्ट देव हमारे,
वास करें प्रभु मन में सदा हमारे.
हैप्पी विश्वकर्मा जयंती

Vishwakarma Jayanti photo
-पूरी दुनिया कर रही है कर्म,
इंसानियत से बड़ा हो गया है आज जाति और धर्म,
कई जगहों पर भूखे-पेट सो रहे इंसान,
उनको भोजन देना हे विश्वकर्मा भगवान.
हैप्पी विश्वकर्मा जयंती

Vishwakarma Jayanti 2025
-इस दुनिया में छाई है,
आपकी ही सुंदर रचना,
सुख और दुख में हम,
आपका नाम जपें हरदम.
हैप्पी विश्वकर्मा जयंती
Vishwakarma Jayanti Ki Shubhkamnaye In Hindi
-जिन्हें कर्म में विश्वास है,
विश्वकर्मा जी उनके पास हैं,
सत्कर्म करते रहते हैं वो पावन धरा पर,
शरीर में उनके जब तक अंतिम सांस है.
हैप्पी विश्वकर्मा जयंती
-करते पूजा हम प्रभु विश्वकर्मा की,
सदा हम पर इनायत रहे मेरे खुदा की,
जन्म-जन्म से हम उनको करते याद,
दिल से हरदम करते विश्वकर्मा की फरियाद.
हैप्पी विश्वकर्मा जयंती
विश्वकर्मा जयंती की पूजा विधि (Vishwakarma Jayanti Puja Vidhi In Hindi)
- इस दिन रोजाना उपयोग में आने वाली मशीनों को साफ किया जाता है।
- फिर एक पवित्र स्थान पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
- इस दिन भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है।
- फिर दोनों देवताओं को कुमकुम, हल्दी, व फूल, फल, अक्षत, अबीर, गुलाल, मेवे, मिठाई इत्यादि चीजें अर्पित की जाती हैं।
- आटे की रंगोली बनाई जाती है और उनके ऊपर सात तरह के अनाज रखे जाते हैं।
- पूजा में एक जल से भरा कलश भी रखा जाता है।
- इस दिन मशीन, वाहन, कारखानों के उपकरणों इत्यादि पर रोली से स्वास्तिक बनाकर पुष्प अर्पित किया जाता है।
- अंत में आरती करके प्रसाद सभी लोगों में बांट दिया जाता है।
विश्वकर्मा जयंती मंत्र (Vishwakarma Jayanti Mantra)
- ओम आधार शक्तपे नम:।
- ओम् कूमयि नम:।
- ओम अनन्तम नम:।
- पृथिव्यै नम: मंत्र।
- ॐ धराधराय नमः
- ॐ स्थूतिस्माय नमः
- ॐ विश्वरक्षकाय नमः
- ॐ दुर्लभाय नमः
- ॐ स्वर्गलोकाय नमः
- ॐ पंचवकत्राय नमः
- ॐ विश्वलल्लभाय नमः
- ॐ धार्मिणे नमः
विश्वकर्मा जयंती कथा (Vishwakarma Jayanti Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार जब सृष्टि का निर्माण हो रहा था, तो वहां सर्वप्रथम भगवान नारायण सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। इसके बाद भगवान विष्णु की नाभि कमल से चतुर्मुख भगवान ब्रह्मा दृष्टिगोचर हुए। ब्रह्मा के पुत्र 'धर्म' और धर्म के पुत्र 'वासुदेव' थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 'वस्तु' से उत्पन्न 'वास्तु' सातवें पुत्र थे,जो शिल्पशास्त्र के ज्ञाता हुए। वासुदेव की पत्नी अंगिरसी' ने भगवान विश्वकर्मा को जन्म दिया। जिस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था उस दिन हर साल विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है।
