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Vasant Purnima 2026 Date: फाल्गुन महीने का आखिरी दिन कब है? जानें वसंत पूर्णिमा 2026 की डेट और टाइम

Vasant Purnima 2026 Date: श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, ‘मैं ऋतुओं में वसंत हूं’ विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार वसंत पूर्णिमा पर व्रत करने से व्यक्ति के सारे पाप खत्म हो जाते हैं। तो अब साल 2026 में वसंत पूर्णिमा कब और किस दिन है, ये आप यहां से जान सकते हैं।

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वसंत पूर्णिमा कब है 2026 में (pc: canva)

Vasant Purnima Kab Hai: वसंत पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। ये दिन वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन कई जगह पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पूजा की जाती है और भजन-कीर्तन किए जाते हैं। हर साल इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। साल 2026 में वसंत पूर्णिमा कब है, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां वसंत पूर्णिमा की सही तरीख और मुहूर्त से भी पता कर सकते हैं।

वसंत पूर्णिमा कब है 2026 में?

पूर्णिमा तिथि मार्च 02, 2026 को 05:55 पी एम बजे पर प्रारम्भ होकर अगले दिन यानी मार्च 03, 2026 को 05:07 पी एम बजे समाप्त होगी। ऐसे में वसंत पूर्णिमा 3 मार्च 2026, दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।

वसंत पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:05 ए एम से 05:55 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:10 पी एम से 12:56 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:20 पी एम से 06:44 पी एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:30 ए एम से 06:44 ए एम
  • विजय मुहूर्त- 02:29 पी एम से 03:16 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:22 पी एम से 07:36 पी एम
  • निशिता मुहूर्त- 12:08 ए एम, मार्च 04 से 12:57 ए एम, मार्च 04
  • अमृत काल- 01:13 ए एम, मार्च 04 से 02:49 ए एम, मार्च 04

वसंत पूर्णिमा मंत्र-

।। अथ श्री-सूक्त मंत्र पाठ ।।

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।

तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।।

अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् ।

श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।

पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।

तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।

आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः ।

तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।

उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह ।

प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।

अभतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।।

गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।

ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि ।

पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।

श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।

नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम् ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।

आर्द्रां य करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।

सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।

य: शुचि: प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।

सूक्तं पंचदशर्चं च श्रीकाम: सततं जपेत् ।।

।। इति समाप्ति ।।

वसंत पूर्णिमा पूजा विधि-

वसंत पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर या फिर घर में ही भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति पर जल चढ़ाना चाहिए। जल चढ़ाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण का ताजा दूध एवं पंचामृत से ‘क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के बाद भगवान श्रीकृष्ण को पीला वस्त्र पहनाकर उन्हें चंदन, अक्षत, मौली, अबीर, गुलाल, इत्र, तुलसी और जनेऊ चढ़ाना चाहिए। इसके बाद मिश्री मिले हुए मक्खन से भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाना चाहिए। इतना सब-कुछ करने के बाद भगवान की आरती करनी चाहिए और श्रद्धा अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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