Varuthini Ekadashi 2024 Katha, Parana Time: वरुथिनी एकादशी वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और इस साल ये तिथि 4 मई को पड़ रही है। मान्यताओं अनुसार इस दिन दान करने का विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं वरुथिनी एकादशी के दिन किया गया दान सूर्य ग्रहण के समय सोना दान करने जितना फलदायी होता है। तो वहीं इस एकादशी का उपवास रखने वाले भक्त लोक और परलोक दोनों में सुख भोगते हैं। यहां आप जानेंगे वरुथिनी एकादशी की कथा, पारण समय, पूजा विधि और महत्व।
वरूथिनी एकादशी 2024 तिथि और पारण समय (Varuthini Ekadashi 2024 Date And Parana Time)
- वरूथिनी एकादशी 4 मई 2024, शनिवार
- 5 मई को पारण समय 05:37 AM से 08:17 AM
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 05:41 PM
- एकादशी तिथि का प्रारम्भ 03 मई 2024 को 11:24 PM बजे
- एकादशी तिथि की समाप्ति 4 मई 2024 को 08:38 PM बजे
वरूथिनी एकादशी की पौराणिक कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha)
प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर एक मान्धाता नामक एक राजा था। वह बड़ा ही दानशील और तपस्वी राजा था। एक समय जब वह किसी जंगल में तपस्या कर रहा था तो उसी समय एक जंगली भालू आया और उसका पैर चबाने लगा। भालू राजा को घसीट कर वन में ले गया। राजा घबराया लेकिन तपस्या धर्म का पालन करते हुए उसने गुस्सा ना करके भगवान विष्णु से प्रार्थना की। राजा की प्रार्थना पर भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए़ और अपने चक्र से भालू का मार डाला। लेकिन तब तक वह भालू राजा का एक पैर खा चुका था। भगवान विष्णु ने राजा को पीड़ा को देखते हुए कहा कि तुम मथुरा जाओ और वहां मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा करें और सात में वरूथिनी एकादशी का व्रत भी करना। इस व्रत के प्रभाव से भालू द्वारा काटा गया तुम्हारा अंग ठीक हो जायेगा। तुम्हारा इस पैर की ऐसी हालत पूर्वजन्म के किसी अपराध के कारण हुई है। भगवान विष्णु की आज्ञा अनुसार राजा ने विधि विधान वरुथिनी एकादशी का व्रत किया जिससे उनका पैर ठीक हो गया।
वरुथिनी एकादशी व्रत पूजा विधि (Varuthini Ekadashi Puja Vidhi)
व्रत से एक दिन पहले यानि दशमी को एक ही बार भोजन करना चाहिए। फिर व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लेकर भगवान की पूजा करें। इस व्रत में व्रती को सिर्फ एक ही बार भोजन करना चाहिए और रात में भगवान का स्मरण करते हुए जागरण करना चाहिए। फिर अगले दिन यानी द्वादशी पर फिर से भगवान की विधि विधान पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दान-दक्षिणा देकर विदा करें। फिर भगवान को चढ़ाएं गए प्रसाद को ग्रहण कर अपना व्रत खोल लें।
वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व (Varuthini Ekadashi Ka Mahatva)
धार्मिक मान्यता है अनुसार किसी ब्राह्मण को दान देने और कन्या दान से मिलने वाले फल से भी बढ़कर माना गया है वरुथिनी एकादशी का व्रत। कहते हैं इस व्रत को करने से भगवान मधुसुदन की कृपा होती है जिससे व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं।
