अध्यात्म

Surya Mantra: रविवार की सुबह जरूर करें इन सूर्य मंत्रों का जाप, सूर्यदेव का मिलेगा आशीर्वाद

Surya Mantra: रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस दिन सूर्य देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और सुबह-सुबह उन्हें जल अर्पित किया जाता है। वहीं, अगर रविवार को सूर्यदेव के कुछ विशेष मंत्रों का जाप भी कर लिया जाए, तो इससे जीवन के संकटों से बचा जा सकता है और हर मुराद पूरी हो सकती है।

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सूर्य मंत्र (Photo Source: Canva)

Surya Mantra: पंचांग के अनुसार, रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। आज के दिन भगवान सूर्य की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ऋग्वेद के देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है। माना जाता है कि रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे में जल लेकर लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, मिश्री डालकर अर्घ्य करने से सभी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है और भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा रविवार के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने के साथ इन मंत्रों का जाप भी करना फलदायी साबित होगा। जानिए सूर्य की पूजा के समय किन मंत्रों का जाप करना लाभकारी होगा।

सूर्य प्रार्थना मंत्र

सूर्य भगवान की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।

विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।।

सूर्याष्टकम

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।

दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते

सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।

श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।

प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बन्धुकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।

एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजः प्रदीपनम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

सूर्य कवच

श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।

शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।

ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत्।।

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।

नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर:।।

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।

जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित:।।

सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।

दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:।।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।

सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति।।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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