अध्यात्म

Surdas Jayanti 2026: सूरदास जयंती पर पढ़ें उनके लिखे भक्तिपूर्ण पद, साथ ही जानें इनका भावपूर्ण अर्थ

Surdas ke Pad in Hindi (सूरदास के पद हिंदी में): भारतीय संत परंपरा के एक महान कवि और भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त सूरदास जी की आज जयंती है। उनकी जयंती के मौके पढ़ें सूरदास के पद।

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सूरदास जी के पद

Surdas ke Pad in Hindi (सूरदास के पद हिंदी में): भक्ति साहित्य की परंपरा में संत सूरदास का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। 15वीं-16वीं शताब्दी के इस महान संत-कवि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान कृष्ण के प्रति अपनी गहरी आस्था और प्रेम को अमर बना दिया। सूरदास जी जिन्हें प्रेम से ‘सूर’ भी कहा जाता है, हिंदी साहित्य के ऐसे चमकते सितारे हैं जिनकी काव्य प्रतिभा आज भी लोगों के हृदय को स्पर्श करती है।

सूरदास की रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी भावनात्मक गहराई और सहज अभिव्यक्ति है। उन्होंने भगवान कृष्ण के बाल रूप, उनकी चंचल लीलाओं, राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति के विभिन्न रूपों का बेहद सुंदर और जीवंत चित्रण किया है। उनकी रचनाएं पढ़ते समय ऐसा लगता है मानो वृंदावन की गलियों में कृष्ण की लीलाएं सजीव हो उठी हों। सूरदास की सबसे प्रसिद्ध कृति सूरसागर है। कहा जाता है कि इसमें लगभग एक लाख पद माने जाते हैं। आज यानी वैशाख शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सूरदास जयंती (Surdas Jayanti 2026) मनाई जाती है। आज सूरदास जयंती के मौके पर पढ़ें उनके चुनिंदा पद अर्थ सहित...

Surdas ke pad in Hindi - सूरदास के पद हिंदी में

1. जो पै जिय लज्जा नहीं, कहा कहौं सौ बार।

एकहु अंक न हरि भजे, रे सठ ‘सूर’ गँवार॥

अर्थ- कवि सूरदास कहते हैं कि जिस व्यक्ति को अपने भीतर कोई लज्जा या शर्म महसूस नहीं होती, उसे बार-बार समझाने का कोई लाभ नहीं। क्योंकि उसने जीवन में एक बार भी भगवान का स्मरण नहीं किया है।

2. सुनि परमित पिय प्रेम की, चातक चितवति पारि।

घन आशा सब दुख सहै, अंत न यांचे वारि॥

अर्थ- जैसे पपीहा बादल की आस में लगातार आकाश की ओर देखता रहता है और हर कष्ट सह लेता है, लेकिन कभी पानी की भीख नहीं मांगता है। वैसे ही सच्चा प्रेम बिना किसी अपेक्षा के होता है।

3. सदा सूँघती आपनो, जिय को जीवन प्रान।

सो तू बिसर्यो सहज ही, हरि ईश्वर भगवान॥

अर्थ- जो भगवान हर समय हमारे साथ हैं और जीवन के आधार हैं, उसी ईश्वर को इंसान बहुत आसानी से भूल जाता है।

4. कह जानो कहँवा मुवो, ऐसे कुमति कुमीच।

हरि सों हेत बिसारिके, सुख चाहत है नीच॥

अर्थ- मनुष्य की बुद्धि कितनी विचित्र है कि वह भगवान से प्रेम और भक्ति को छोड़कर भी जीवन में सुख पाने की इच्छा रखता है।

5.दीपक पीर न जानई, पावक परत पतंग।

तनु तो तिहि ज्वाला जरयो, चित न भयो रस भंग॥

अर्थ- पतंगा दिये की लौ पर जलकर भस्म हो जाता है पर दीपक इसकी पीड़ा को नहीं जानता। पतंग का शरीर तो दीपक की ज्वाला में जलकर भस्म हो जाता है पर इसका प्रेम नष्ट नहीं होता।

6. अखियाँ हरि दर्शन की प्यासी।

देखौं कब नंदलाल गिरधारी, मन में बड़ी उदासी॥

अर्थ - भक्त कहता है कि उसकी आँखें भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए तरस रही हैं। उनके बिना मन उदास और बेचैन रहता है।

7. प्रभु जी तुम चंदन हम पानी।

जाकी अंग-अंग बास समानी॥

अर्थ - भक्त कहता है कि प्रभु चंदन के समान हैं और वह पानी की तरह है। जैसे चंदन की खुशबू पानी में मिल जाती है, वैसे ही भगवान का प्रभाव भक्त के जीवन में समा जाता है।

8. जसोदा हरि पालने झुलावै।

हलरावै, दुलरावै, लोरि गावत सुलावै॥

अर्थ - माता यशोदा बाल कृष्ण को पालने में झुलाती हैं, प्यार से उन्हें सुलाती हैं और लोरी गाती हैं। यह पद वात्सल्य (माँ के प्रेम) का सुंदर चित्रण करता है।

9. मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।

मोरे माखन को सोंचि-सोंचि, मुख लपटायो॥

अर्थ - बाल कृष्ण अपनी माँ से शिकायत करते हैं कि बड़े भाई बलराम उन्हें चिढ़ाते हैं और माखन खाने का आरोप लगाते हैं। यह पद बाल-लीलाओं की मासूमियत को दर्शाता है।

10. निस दिन बरसत नैन हमारे।

सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जब ते श्याम सिधारे॥

अर्थ - भक्त कहता है कि कृष्ण के वियोग में उसकी आँखों से दिन-रात आँसू बहते रहते हैं। ऐसा लगता है जैसे उसके जीवन में हमेशा बरसात का मौसम बना हुआ है।

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gulshan kumar
गुलशन कुमार author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

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