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Siddhidatri Jayanti 2026: अप्रैल 2026 में सिद्धिलक्ष्मी जयंती कब है, यहां से नोट करें तिथि, पूजा मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि

Siddhidatri Jayanti 2026: हर साल वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती मनायी जाती है। यहां से आप जान सकते हैं कि अप्रैल 2026 में सिद्धिलक्ष्मी जयंती कब मनाई जाएगी।

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सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026 तिथि, मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि (pc: pinterest)

Siddhidatri Jayanti 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती मनायी जाती है। देवी सिद्धिलक्ष्मी को द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में से एक रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि देवी सिद्धिलक्ष्मी की आराधना करने से लक्ष्मी, अर्थात् धन-सम्पत्ति एवं सिद्धि प्राप्त होती है। धर्मग्रन्थों में देवी सिद्धिलक्ष्मी को अष्टलक्षणा कहा गया है। अष्टलक्षणा अर्थात् वो देवी, जिनकी आराधना करने से आठ प्रकार की समृद्धियां प्राप्त होती हैं- धन, धान्य, पुत्र, आरोग्य, ज्ञान, सौभाग्य, विजय तथा मोक्ष। तो साल 2026 में सिद्धिलक्ष्मी जयंती कब मनाई जाएगी, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां सिद्धिलक्ष्मी जयंती की तिथि, पूजा मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि के बारे में भी बताया गया है।

सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026 तिथि-

वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 26 अप्रैल की शाम 18 बजकर 06 मिनट पर शुरू होकर 27 अप्रैल को 18 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में 27 अप्रैल 2026, दिन सोमवार को सिद्धिलक्ष्मी जयंती मनाई जाएगी।

सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026 मुहूर्त-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:17 से 05:01
  • अभिजित मुहूर्त- 11:53 से 12:45
  • गोधूलि मुहूर्त- 18:53 से 19:14
  • अमृत काल- 14:41 से 16:20
  • विजय मुहूर्त- 14:31 से 15:23
  • सायाह्न सन्ध्या- 18:54 से 19:59

सिद्धिलक्ष्मी जयंती मंत्र-

  • मूल मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः ॥
  • स्थिर लक्ष्मी हेतु मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै मम गृहे धन पूरये पूरये, चिंतायै दूरये दूरये स्वाहा ॥

सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026 पूजा विधि-

सिद्धिलक्ष्मी जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर घर और पूजा स्थान को साफ-सुथरा करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक और अगरबत्ती जलाएं, इसके बाद रोली और अक्षत अर्पित करें। माता को फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं तथा थोड़ा जल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा से ऊं श्रीं सिद्धिलक्ष्म्यै नमः मंत्र का जाप करें, जितना संभव हो उतनी बार करें। अंत में लक्ष्मी जी की आरती करें और अपने घर की सुख-समृद्धि तथा सफलता के लिए प्रार्थना करें। पूजा के बाद प्रसाद सभी में बांटें और पूरे दिन घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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