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Shukra Pradosh Vrat: सितंबर का पहला शुक्र प्रदोष व्रत आज, जानें शुक्रवार प्रदोष व्रत की सही तारीख, मुहूर्त और पूजा की विधि

Shukra Pradosh Vrat: एक महीने में 2 प्रदोष व्रत होते हैं। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत किया जाता है। यहां से आप शुक्र प्रदोष व्रत की सही डेट, पूजा का मुहूर्त और पूजा की विधि जानें।

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शुक्र प्रदोष व्रत डेट, मुहूर्त, पूजा विधि (pic credit: AI)

Shukra Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत, हिन्दू धर्म में हर महीने की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए रखा जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा। शुक्र प्रदोष व्रत रखने से महादेव की कृपा बरसती है। खासतौर से इस व्रत को शादीशुदा जोड़े रखते हैं, जिससे पति-पत्नी में प्यार बना रहता है। इस व्रत को रखने से ग्रहों के बुरे प्रभाव को कम करता है। साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। अब सितंबर में शुक्र प्रदोष व्रत कब है, इसकी डेट को लेकर काफी कंफ्यूजन है। आप यहां से शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि विस्तार में जान सकते हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत तिथि (Shukra Pradosh Vrat 2025 Date)-

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सतंबर को सुबह 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 6 सितंबर को प्रातः 3 बजकर 12 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में प्रदोष व्रत शुक्रवार 5 सितंबर को किया जाएगा।

शुक्र प्रदोष व्रत मुहूर्त (Shukra Pradosh Vrat Puja Muhurat)-

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा 5 सितंबर के दिन शाम 6 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 55 मिनट के बीच किया जाएगा।

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Shukra Pradosh Vrat Puja Vidhi)-

सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों को निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद साफ-सुथरे और सूखे वस्त्र धारण कर लें। प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की कृपा के लिए पूजा के दौरान शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से अभिषेक करें। इसी के साथ शिव जी को बेलपत्र, फल, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य आदि चढ़ाएं। गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। रात्रि में शिव मंदिर में दीपक जलाने का विशेष महत्व है, जिससे धन प्राप्ति के योग बनते हैं। धन की कमी को दूर करने के लिए, शिवलिंग पर अक्षत, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, बेलपत्र, धतूरा और सुगंधित तेल चढ़ाने से भी धन-धान्य की वृद्धि होती है। शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से व्यक्ति को धन-धान्य और भौतिक सुख प्राप्त होते हैं। शिवलिंग पर लौंग का जोड़ा, सफेद चंदन या अरहर दाल चढ़ाने से भी धन की कमी दूर होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इस दिन पर आप शिव चालीसा के साथ-साथ शिव जी के मंत्रों का भी जप कर सकते हैं। महादेव को खीर, दही या फिर सूजी के हलवे का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर शिव जी की आरती करें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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