Shri Krishna 56 Bhog History in Hindi: पौराणिक कथाओं और हिंदू ग्रंथो के मुताबिक ये तो हर किसी को पता है कि, श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे। इसी की वजह है कि भगवान श्री कृष्ण जब तक इस धरती पर रहे, संघर्ष और कड़ी मेहनत से श्री कृष्ण ने कभी मुह नहीं मोड़ा। विपरीत परिस्थियों में भी श्री कृष्ण कभी विचलित नहीं हुए। पृथ्वी पर जन्म लेकर जब श्री कृष्ण धर्म की स्थापना कर रहे थे, उस समय ब्रजवासियों की रक्षा के लिए उन्होंने भगवान इंद्र का भी एक बार घमंड तोड़ा था। ऐसा कहा जाता है कि, बृजवासी इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए एक बड़ा हवन करने की तैयारी में जुटे थे, तब श्री कृष्ण ने नंद बाबा से पूछा था, कि ये आयोजन किस लिए हो रहा है। तब नंद बाबा ने कहा था कि, ये आयोजन स्वर्ग के भगवान इंद्र को खुश करने के लिए किया जा रहा है। ताकि वो अच्छी बारिश करें जिससे ब्रजवासियों ने खेत में जो फसल लगाई है वो अच्छी तरह उपजे।
तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा जब बारिश कराना इंद्रदेव का काम है, तो उनकी पूजा करनी क्यों जरूरी है। अगर पूजा करनी है तो गोवर्धन पर्वत की करो क्योंकि इससे फल-सब्जियां प्राप्त होती हैं, और जानवरों को चारा मिलता है। तब सभी को भगवान श्री कृष्ण की बात अच्छी लगी। सभी ने इंद्र की पूजा ना करके गोवर्धन पर्वत की पूजा की।
सिर्फ भगवान कृष्ण को ही क्यों लगाया जाता है 56 भोग ?
ब्रजवासियों के गोवर्धन पर्वत की पूजा करने पर भगवान इंद्र को बहुत ज्यादा गुस्सा आया। उन्होंने पूरे ब्रज में भयंकर वर्षा की, ब्रज समेत आस-पास के इलाकों में बाढ़ आने लगी, और लोगों के घरो में पानी घुसने लगा। तब ब्रजवासियों ने नंद बाबा के घर के बाहर जाकर मदद मांगी। लेकिन काले-काले बादल और भारी बारिश के चलते नंद बाबा चाह कर भी उनकी मदद करने में अस्मर्थ रहे। जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण सभी की मदद के लिए आगे आए और उन्होंने सभी ब्रजवासियों को अपने पीछे आने को कहा, और सभी को गोवर्धन पर्वत के पास लेकर गए। और तब भगवान श्री कृष्ण ने एक हाथ में मुरली ली और दूसरे हाथ की एक उंगली से पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया। पूरे 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत के नीचे ब्रजवासियों की रक्षा करते रहे। इस दौरान 7 दिनों तक श्री कृष्ण को भूखा रहना पड़ा। जिसके बाद उन्हें अगले 7 दिनों तक दिन भर में 8 बार नए-नए पकवान खिलाए गए। तब से 56 भोग की प्रथा आज तक जारी है। और लोग बड़े प्रेम भाव से भगवान श्री कृष्ण को 56 व्यंजनों का भोग लगाते हैं।
56 भोग में कौन-कौन सी चीजें होती हैं शामिल
ऐसा माना जाता है कि 56 भोग में कड़वा, तीखा, कसैला, अम्ल, नमकीन और मीठे पदार्थ शामिल होते हैं। इनमें छह रस और स्वाद होते हैं जिससे 56 तरह के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। इसलिए 56 भोग का मतलब है ऐसा खाना जिसमें सभी प्रकार के व्यंजन सम्मलित हों। आज भी लोग इन प्रमुख बातों को ध्यान में रखते हुए विराट स्वरूप श्री कृष्ण भगवान के लिए 56 भोग तैयार करते हैं। और बड़ी श्रद्धा के साथ श्री कृष्ण को इसका भोग लगाते हैं। इन व्यंजनों में 56 प्रकार की वो सभी चीजें होती हैं, जो कृष्ण भगवान को बेहद पसंद हैं। और आज भी लोग जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण को 56 भोग लगाना नहीं भूलते।
क्या है 56 भोग का प्रसाद
श्री कृष्ण को 56 भोग में 56 तरह की चीजें चढ़ाई जाती हैं, ये चीजें भगवान कृष्ण को बेहद ही पसंद हैं
आइए जानते हैं 56 भोग में चढ़ाई जाने वाली चीजों के बारे में
1 चावल 2 दाल 3 चटनी 4 कढ़ी 5 शाक की कढ़ी 6 सिखरन 7 शरबत 8 बाटी 9 मुरब्बा 10 शर्करा युक्त 11 बड़ा 12 मठरी 13 फेनी 14 पूरी 15 खजला 16 घेवर 17 मालपुआ 18 चोला 19 जलेबी 20 मेसू 21 रसगुल्ला 22 पगी 23 महारायता 24 थूली 25 लौंगपूरी 26 खुरमा 27 दलिया 28 परिखा 29 सौंफ 30 बिलसारू 31 लड्डू 32 साग 33 अधानौ अचार 34 मोठ 35 खीर 36 दही 37 गोघृत 38 मक्खन 39 मलाई 40 कूपिका 41 पापड़ 42 सीरा 43 लस्सी 44 सुवत 45 मोहन 46 सुपारी 47 इलायची 48 फल 49 तांबूल 50 मोहन भोग 51 लवण 52 कषाय 53 मधुर 54 तिक्त 55 कटु 56 अम्ल
