आज महाशिवरात्रि पर जरूर करें शिव चालीसा का पाठ, भोलेनाथ-पार्वती की कृपा पाने का सरल मार्ग, देखें शिव चालीसा लिखित में
- Authored by: गुलशन कुमार
- Updated Feb 15, 2026, 05:47 AM IST
Shiv Chalisa Lyrics in Hindi (शिव चालीसा लिखित में), आज कौन सी चालीसा पढ़ें: हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना करना महत्वपूर्ण माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना के लिए शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। यहां पढ़ें शिव चालीसा के लिरिक्स इन हिंदी।
शिव चालीसा
Shiv Chalisa Lyrics in Hindi (शिव चालीसा लिखित में): हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव भक्त बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव का व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं। इसी क्रम में शिव चालीसा का पाठ भी पुण्य फलदायी माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा से शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज कौन सी चालीसा पढ़ें तो महाशिवरात्रि के दिन शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। यहां पढ़ें शिव चालीसा के लिरिक्स हिंदी में...
शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics In Hindi)
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला।
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे।
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहीं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला । जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घट वासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत हैं शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहत अयोध्या आस तुम्हारी। जानी सकल दुःख हरहु हमारी॥
।।दोहा।।
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
शिव चालीसा पाठ करने का सही तरीका
शिव चालीसा का पाठ करने से पहले स्नान करके साफ वस्त्र पहनना और भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग के सामने दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए अपनी पूजा को आगे बढ़ाना चाहिए। इसके बाद आप श्रद्धा से शिव चालीसा का पाठ शुरु कर सकते हैं।
शिव चालीसा का धार्मिक महत्व
शिव चालीसा में भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया जाता है। जिसमें शिव के स्वरूप, उनके गुणों और उनकी कृपा का सुंदर वर्णन किया जाता है। भगवान शिव के भक्तों का विश्वास है कि नियमित रूप से शिव चालीसा पढ़ने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर इसका पाठ बेहद शुभ फल देने वाला होता है।
