Shiv Ji Ki Aarti (शिव जी की आरती): अधिक मास की शिवरात्रि (Adhik Maas Shivratri) बेहद खास मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये हर तीन साल में एक बार आती है। दरअसल जिस साल में अधिकमास यानि मलमास लगता है उसी साथ में ये शिवरात्रि पड़ती है। इस बार अधिक मास की शिवरात्रि सावन महीने (Sawan Shivratri) में पड़ी है जिस वजह से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। इस दिन शिव की विधि विधान पूजा करने के बाद उनकी इस आरती को जरूर करें। यहां देखें शिव की आरती के लिरिक्स लिखित (Shiv Aarti Lyrics Likhit)।
शिव जी की आरती के लिरिक्स (Shiv Ji Ki Aarti Likhit)
ॐ जय शिव ओंकारा… आरती
जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
ॐ जय शिव ओंकारा
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा
लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
शिव जी की आरती वैसे तो प्रत्येक दिन करनी चाहिए। लेकिन अगर रोजाना ये कर पाना संभव न हो तो सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन तो जरूर ही इस आरती को करें। इससे आपके जीवन में सदैव खुशियां बनी रहेंगी।
