अध्यात्म

Sheetala Mata Chalisa: शीतला अष्टमी के दिन करें शीतला माता चालीसा का पाठ, देखें लिरिक्स यहां

Sheetala Mata Chalisa (माता शीतला की चालीसा): होली के बाद आने वाली अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। आज वही खास दिन है। इस दिन शीतला माता का चालीसा जरूर पढ़ा जाता है। यहां से आप शीतला माता चालीसा पढ़ सकते हैं।

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शीतला माता चालीसा (AI Generated)

Sheetala Mata Chalisa (माता शीतला की चालीसा): आज शीतला अष्टमी है और आज के दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि माता शीतला चेचक, बुखार और त्वचा के रोगों से रक्षा करती हैं। शीतला अष्टमी पर चूल्हा नहीं जलाया जाता और पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही शीतला चालीसा का पाठ किया जाता है। यहां से आप शीतला माता की चालीसा के लिरिक्स देख सकते हैं।

Sheetala Mata Chalisa (शीतला माता चालीसा लिरिक्स)-

'दोहा'

जय-जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान।

होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बल ज्ञान।।

घट घट वासी शीतला शीतल प्रभा तुम्हार।

शीतल छैंय्या शीतल मैंय्या पल ना दार।।

'चौपाई'

जय-जय-जय श्री शीतला भवानी। जय जग जननि सकल गुणधानी।।

गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित। पूरन शरन चंद्रसा साजती।।

विस्फोटक सी जलत शरीरा। शीतल करत हरत सब पीरा।।

मातु शीतला तव शुभनामा। सबके गाढ़े आवहिं कामा।।

शोकहरी शंकरी भवानी। बाल-प्राणरक्षी सुखदानी।।

शुचि मार्जनी कलश करराजै। मस्तक तेज सूर्य समसाजे।।

चौसठ योगिन संग में गावैं। वीणा ताल मृदंग बजावै।।

नृत्य नाथ भैरो दिखरावैं। सहज शेष शिव पार ना पावैं।।

धन्य-धन्य भात्री महारानी। सुरनर मुनि तब सुयश बखानी।।

ज्वाला रूप महा बलकारी। दैत्य एक विस्फोटक भारी।।

ज्वाला रूप महाबल कारी। दैत्य एक विश्फोटक भारी।।

हर हर प्रविशत कोई दान क्षत। रोग रूप धरी बालक भक्षक।।

हाहाकार मचो जग भारी। सत्यो ना जब कोई संकट कारी।।

तब मैंय्या धरि अद्भुत रूपा। कर गई रिपुसही आंधीनी सूपा।।

विस्फोटक हि पकड़ी करी लीन्हो। मुसल प्रमाण बहु बिधि कीन्हो।।

बहु प्रकार बल बीनती कीन्हा। मैय्या नहीं फल कछु मैं कीन्हा।।

अब नही मातु काहू गृह जै हो। जह अपवित्र वही घर रहि हो।।

पूजन पाठ मातु जब करी है। भय आनंद सकल दुःख हरी है।।

अब भगतन शीतल भय जै हे। विस्फोटक भय घोर न सै हे।।

श्री शीतल ही बचे कल्याना। बचन सत्य भाषे भगवाना।।

कलश शीतलाका करवावै। वृजसे विधीवत पाठ करावै।।

विस्फोटक भय गृह गृह भाई। भजे तेरी सह यही उपाई।।

तुमही शीतला जगकी माता। तुमही पिता जग के सुखदाता।।

तुमही जगका अतिसुख सेवी। नमो नमामी शीतले देवी।।

नमो सूर्य करवी दुख हरणी। नमो नमो जग तारिणी धरणी।।

नमो नमो ग्रहोंके बंदिनी। दुख दारिद्रा निस निखंदिनी।।

श्री शीतला शेखला बहला। गुणकी गुणकी मातृ मंगला।।

मात शीतला तुम धनुधारी। शोभित पंचनाम असवारी।।

राघव खर बैसाख सुनंदन। कर भग दुरवा कंत निकंदन।।

सुनी रत संग शीतला माई। चाही सकल सुख दूर धुराई।।

कलका गन गंगा किछु होई। जाकर मंत्र ना औषधी कोई।।

हेत मातजी का आराधन। और नही है कोई साधन।।

निश्चय मातु शरण जो आवै। निर्भय ईप्सित सो फल पावै।।

कोढी निर्मल काया धारे। अंधा कृत नित दृष्टी विहारे।।

बंधा नारी पुत्रको पावे। जन्म दरिद्र धनी हो जावे।।

सुंदरदास नाम गुण गावत। लक्ष्य मूलको छंद बनावत।।

या दे कोई करे यदी शंका। जग दे मैंय्या काही डंका।।

कहत राम सुंदर प्रभुदासा। तट प्रयागसे पूरब पासा।।

ग्राम तिवारी पूर मम बासा। प्रगरा ग्राम निकट दुर वासा।।

अब विलंब भय मोही पुकारत। मातृ कृपाकी बाट निहारत।।

बड़ा द्वार सब आस लगाई। अब सुधि लेत शीतला माई।।

'दोहा'

यह चालीसा शीतला पाठ करे जो कोय।

सपनें दुख व्यापे नही नित सब मंगल होय।।

बुझे सहस्र विक्रमी शुक्ल भाल भल किंतू।

जग जननी का ये चरित रचित भक्ति रस बिंतू।।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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