अध्यात्म

Maha Navami Ki Katha: महा नवमी व्रत कथा इन हिंदी, हिंदी में पढ़ें मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा और कहानी

Navratri Day 9 Maa Siddhidatri Vrat Katha (मां सिद्धिदात्री व्रत कथा): आज शारदीय नवरात्रि की महा नवमी है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में ये नौंवां दिन मां दुर्गा की नौंवीं शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की कथा भी पढ़ी जाती है। यहां से आप महा नवमी की व्रत कथा या कहानी पढ़ सकते हैं।

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महा नवमी 2025 व्रत कथा (pic credit: Canva)

Navratri Day 9 Maa Siddhidatri Vrat Katha (मां सिद्धिदात्री व्रत कथा): माँ सिद्धिदात्री की पौराणिक व्रत कथा के अनुसार जब सृष्टि की शुरुआत हुई, तब चारों ओर अंधकार और शून्यता थी। न कोई जीव था, न देवता, न त्रिदेव। तब आदिशक्ति ने स्वयं को प्रकटीकरण कर माँ सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट किया। वही शक्ति सृष्टि की मूल आधार बनीं। उन्होंने ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव की रचना की और उन्हें सृष्टि, पालन और संहार के कार्य सौंपे। भगवान शिव को जब यह ज्ञान हुआ कि बिना शक्ति के वह संहार के कार्य में सक्षम नहीं हो सकते, तब उन्होंने माँ सिद्धिदात्री की तपस्या की। माँ ने प्रसन्न होकर उन्हें आठ महाशक्तियाँ या सिद्धियाँ प्रदान की- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। माँ की कृपा से शिव ने अर्धनारीश्वर रूप धारण किया, जो यह दर्शाता है कि शक्ति और शिव एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही त्रिदेवों को अपने-अपने कर्तव्यों के लिए पूर्ण ज्ञान और सामर्थ्य मिला। आज भी जो भक्त श्रद्धा से नवमी के दिन उनका व्रत रखते हैं, कथा सुनते हैं और पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता, सिद्धि, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा पढ़ने का महत्व

नवरात्रि के नवें दिन जब भक्त माँ सिद्धिदात्री का पूजन करते हैं, तब उनकी कथा का श्रवण या पाठ करना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का साधन होता है। इस कथा में माँ के उस स्वरूप का वर्णन है जिन्होंने सृष्टि के प्रारंभ में त्रिदेवों को शक्ति और सिद्धियाँ प्रदान कीं। कथा पढ़ने से मनुष्य को यह ज्ञान प्राप्त होता है कि शक्ति के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं, यहाँ तक कि देवों का भी नहीं। जब भगवान शिव ने भी माँ की तपस्या कर उनसे अष्ट सिद्धियाँ प्राप्त कीं, तो यह मनुष्य को विनम्रता और साधना का मार्ग दिखाता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से इस दिन व्रत रखकर माँ सिद्धिदात्री की कथा पढ़ता या सुनता है, उसे न केवल सांसारिक सुख और सफलता मिलती है, बल्कि आत्मबल, योग सिद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान भी प्राप्त होता है। यह कथा पढ़ना माँ को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है, जिससे वह अपने भक्त को भय, बाधा और अज्ञान से मुक्त करती हैं और जीवन में सिद्धि, संतुलन और मोक्ष की ओर मार्गदर्शन करती हैं।

मां सिद्धिदात्री आरती

सिद्धिदात्री माता की आरती

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता

तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि

कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम

हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,

तेरी पूजा में न कोई विधि है

तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है

रविवार को तेरा सुमरिन करे जो

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,

तू सब काज उसके कराती हो पूरे

कभी काम उस के रहे न अधूरे

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया

रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया,

सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली

जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा

महानंदा मंदिर में है वास तेरा,

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता

वंदना है सवाली तू जिसकी दाता..

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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