Sharad Purnima Ka Vrat Kaise Rakhen: शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन शरद पूर्णिमा का अपना ही विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा को आश्विन पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा का त्योहार 6 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही शाम के समय चंद्रमा की पूजा की जाती है और चांद की रोशनी में खीर रखा जाता है। यहां से आप जानें की शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे रखा जाता है।
शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे रखें? (Sharad Purnima Vrat Vidhi)-
- घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें।
- व्रत का संकल्प मन में लें कि आप शुद्धता, नियम और श्रद्धा से व्रत करेंगे।
- व्रत के दिन केवल फलाहार या एक समय भोजन का नियम लें।
- सुबह उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूरे दिन चंद्र देव का ध्यान करते रहें।
- दिन में लक्ष्मी माता का भी ध्यान करें, भजन, जप, या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
- अगर निर्जला उपवास संभव न हो तो जल, फल, दूध आदि का सेवन कर सकते हैं।
- जब पूर्णिमा का चांद निकल आए तब चंद्र देव को दूध या जल में चावल मिलाकर अर्घ्य दें।
- संभव हो तो रात में जागरण करें और भजन-कीर्तन गाएं।
शरद पूर्णिमा की पूजा का समय 2025 (Sharad Purnima Puja Time Today)-
- ब्रह्म मुहूर्त- 4:53AM से 5:42AM
- अभिजित मुहूर्त- 12:03PM से 12:50PM
- विजय मुहूर्त- 02:25PM से 03:13PM
- गोधूलि मुहूर्त- 6:23PM से 6:47PM
- अमृत काल- 11:40PM से 1:07AM (7 अक्टूबर)
- निशिता मुहूर्त- 12:02AM (7 अक्टूबर)
शरद पूर्णिमा पूजा विधि (Sharad Purnima Puja Vidhi)-
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। घर और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। व्रत रखने का संकल्प लें। सफेद या पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। घर में उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में एक स्वच्छ स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाएं। चंद्र देव व लक्ष्मी माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। एक तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर आम के पत्ते रखें और नारियल रखें। फिर कलश पर कुमकुम, अक्षत, पुष्प चढ़ाएं। लक्ष्मी माता की पूजा करें और रोली, चावल, पुष्प, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। श्री लक्ष्मी चालीसा या लक्ष्मी स्तोत्र पढ़ें। रात को चंद्र दर्शन करें। जल या दूध से चंद्र देव को अर्घ्य दें। ॐ चंद्राय नमः या ॐ सोमाय नमः मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें। खीर का भोग लगाएं, फिर उसे चांदनी में खुले आकाश के नीचे रखें। चंद्र देव की आरती करें। अगली सुबह उठकर स्नान करें और फिर खीर को भगवान को भोग लगाकर स्वयं और परिवारजनों को प्रसाद रूप में दें।
