Shani Pradosh Vrat 2024 Date: प्रदोष का व्रत हर मास में दो बार रखा जाता है। ये व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है। इस दिन व्रत करने ने से और महादेव की विधिवत पूजा करने से साधक की सारी मनोकामना की पूर्ति होती है। अभी साल 2024 का आखिरी महीना दिसंबर चल रहा है। ऐसे में अब साल 2024 का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जाएगा। साल का आखिरी प्रदोष व्रत शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा, क्योंकि ये शनिवार के दिन पड़ रहा है। शनि प्रदोष के दिन शिव जी और शनि जी की पूजा करने से भक्तों को उत्तम फल मिलता है और शनि दोष से मुक्ति मिलती है। आइए जानें कि दिसंबर के महीने में शनि प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।
Shani Pradosh Vrat 2024 Date (दिसंबर शनि प्रदोष व्रत डेट 2024)
हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदयशी तिथि की शुरुआत 28 दिसंबर को सुबह 2 बजकर 26 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 दिसंबर को सुबह 3 बजकर 32 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए शनि प्रदोष व्रत 28 दिसंबर 2024 को रखा जाएगा।
Shani Pradosh Vrat 2024 Shubh Muhurat (दिसंबर 2024 शनि प्रदोष शुभ मुहूर्त)
साल 2024 का आखिरी शनि प्रदोष व्रत 28 दिसंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम के 5 बजकर 21 मिनट से लेकर रात के 8 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस शुभ समय में शिव जी की पूजा करना उत्तम होगा।
Shani Pradosh Vrat Puja Vidhi (शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि)
- शनि प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- उसके बाद घर के मंदिर की सफाई कर साफ चौकी पर शिव जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- फिर पूरे विधि- विधान से फूल, बेलपत्र अर्पित करके शिव जी की पूजा करें।
- शाम के समय में स्नान के बाद फिर से शिव परिवार की पूजा करें।
- इस दिन शाम के समय में शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग की पूजा करें।
- अंत में शनि प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें और आरती करें।
- शनि प्रदोष के दिन शनि देव जी की पूजा करने का विधान है।
Shani Pradosh Vrat Significance (शनि प्रदोष व्रत महत्व)
शास्त्रों में शनि प्रदोष के व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। ये व्रत भगवान शिव और शनि देव की पूजा को समर्पित होता है। शनि प्रदोष का व्रत रखने से शिव जी की कृपा तो प्राप्त होती है। इसके साथ ही शनि के कुप्रभाव से साधक को जल्द छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही शनि को कुंडली में मजबूत करने के लिए भी शनि प्रदोष व्रत उत्तम माना जाता है। इस व्रत के प्रभाव से शिव जी अपने भक्तों के सारे बिगड़े काम बनाते हैं और उनको लाभ की प्राप्ति होती है।
