अध्यात्म

क्या आज शब-ए-कद्र है, शब-ए-कद्र कब है, यह रात क्यों खास होती है, शब-ए-क्रद पर क्या करना चाहिए?

Shab-E-Qadr 2026 Date And Importance In Islam : साल 2026 में 19 मार्च से रमजान के पाक महीने की शुरुआत हो चुकी है। अब यह महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है, अभी तीसरा अशरा चल रहा है। तीसरे अशरे में ही शब-ए-कद्र की रात आती है। आइए जानते हैं कि यह रात कब है और यह क्यों खास है?

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शब-ए-कद्र 2026 कब है?

Shab-E-Qadr 2026 Date And Importance In Islam : रमजान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रोजा और अल्लाह की रहमत हासिल करने का समय माना जाता है। इस पूरे महीने में एक ऐसी रात आती है जिसे इस्लाम में सबसे ज्यादा पवित्र माना गया है। इस रात को शब-ए-कद्र या लैलतुल कद्र कहा जाता है। इसे अंग्रेजी में 'नाइट ऑफ पावर' भी कहा जाता है। इस रात की इबादत को हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर बताया गया है। इस्लामी मान्यता के अनुसार यह रात दुआ, तौबा और अल्लाह की रहमत पाने का खास मौका होती है।

साल 2026 में शब-ए-कद्र कब है? (Shab-e-Qadr Kab Hai 2026)

इस्लामी परंपरा के अनुसार शब-ए-कद्र की कोई एक निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। इसे रमजान के आखिरी दस दिनों की विषम रातों में तलाश करने की बात कही गई है। यानी 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात में से किसी एक रात शब-ए-कद्र हो सकती है।

हालांकि अधिकतर मुस्लिम समुदाय 27वीं रमजान की रात को शब-ए-कद्र मानकर खास इबादत करते हैं। वर्ष 2026 में इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 27वीं रमजान की रात 16 मार्च की शाम से 17 मार्च की सुबह तक मानी जा रही है। इस कारण आज 16 मार्च की रात को शब-ए-कद्र की प्रमुख और पवित्र रात माना जा रहा है।

शब-ए-कद्र क्या है? (Shab-e-Qadr Kya Hai)

इस्लाम धर्म में शब-ए-कद्र का मतलब है कद्र या ताकत की रात। इस्लामी मान्यता के अनुसार इसी रात इंसानियत की रहनुमाई के लिए पवित्र किताब कुरआन की पहली आयत नाजिल हुई थी। फरिश्ता जिब्रील के जरिए यह संदेश पैगंबर मुहम्मद तक पहुंचाया गया था।

कुरआन की सूरह अल-कद्र में इस रात के बारे में विस्तार से बताया गया है। सूरह अल-कद्र में लिखा है कि 'निस्संदेह हमने इस (कुरआन) को शब-ए-कद्र की रात में उतारा। और तुम्हें क्या मालूम कि शब-ए-कद्र क्या है। शब-ए-कद्र की रात हजार महीनों से बेहतर है। उसमें फरिश्ते और रूह अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं। यह रात पूरी तरह सलामती ही सलामती है, जो फज्र के निकलने तक रहती है।'

इसी वजह से मुसलमान इस रात को बेहद खास मानते हैं और ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं।

शब-ए-कद्र का महत्व (Shab-e-Qadr Ka Mahatva)

शब-ए-कद्र को इस्लाम की सबसे बरकत वाली रातों में गिना जाता है। इस रात को अल्लाह की रहमत और माफी की रात कहा जाता है। इस्लामी हदीसों में भी इसकी बहुत अहमियत बताई गई है।

एक हदीस में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने फरमाया कि जो व्यक्ति ईमान और सवाब की उम्मीद के साथ शब-ए-कद्र की रात इबादत करता है, उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। इसी कारण मुसलमान इस रात को अल्लाह की रहमत और मगफिरत पाने का सबसे बड़ा मौका मानते हैं।

शब-ए-कद्र की रात क्या किया जाता है? (Shab-e-Qadr Ki Raat Kya Kiya Jata Hai)

शब-ए-कद्र की रात मुसलमान पूरी रात इबादत करने की कोशिश करते हैं। लोग नफ्ल नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह का जिक्र करते हैं। कई लोग रात के आखिरी हिस्से में तहज्जुद की नमाज भी अदा करते हैं।

इसके अलावा इस रात दुआ करना, गुनाहों की माफी मांगना और जरूरतमंदों की मदद करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। कई लोग इस रात सदका देते हैं और ज्यादा से ज्यादा नेक काम करने की कोशिश करते हैं।

मुसलमानों के लिए शब-ए-कद्र की रात सिर्फ एक धार्मिक अवसर ही नहीं बल्कि अल्लाह के करीब आने और अपने गुनाहों से तौबा करने का सबसे बड़ा मौका भी मानी जाती है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पब्लिक डोमेन में उपस्थित जानकारी पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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