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Shab E Meraj 2025: शब-ए-मेराज का इतिहास, जानिए नमाज पढ़ने का तरीका और सहरी-इफ्तार की टाइमिंग

Shab E Meraj 2025: शब-ए-मेराज का पर्व इस्लामिक रजब महीने की 27वीं तारीख को मनाया जाता है। मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं अनुसार ये वही रात थी जब हज़रत मुहम्मद सात आसमानों की यात्रा करके अल्लाह से मिले थे। जानिए इस साल कब मनाया जा रहा है ये त्योहार और क्या है इसका इतिहास, साथ ही जानेंगे शब-ए-मेराज की नमाज का तरीका।

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Shab E Meraj 2025 Date, Sehri-Iftar Time

Shab E Meraj 2025: शब-ए-मेराज इस्लाम धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। जो इस्लामी कैलेंडर अनुसार रजब महीने की 27वीं तारीख को मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ये वही रात है जब हजरत मुहम्मद सात आसमानों की यात्रा करके अल्लाह से मिले थे। इसलिए ये रात 'पाक रात' भी मानी जाती है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान विशेष प्रार्थना करते हैं और अल्लाह से क्षमा मांगते हैं। मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन जो कोई भी रात में अल्लाह की इबादत करता है उसे कई रातों में इबादत करने जितना सवाब एक ही साथ मिल जाता है।

Shab E Meraj 2025 Date (शब ए मेराज कब है 2025)

इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार भारत में शब-ए-मेराज पर्व 27 जनवरी 2025 को सूर्यास्त के बाद से शुरू हो जाएगा जो 28 जनवरी के सूर्यास्त तक मनाया जाएगा।

Shab E Meraj 2025 Sehri-Iftar Time (शब ए मेराज 2025 सहरी-इफ्तार समय)

तारीखसहरी इफ्तार
27 जनवरी 202505:48 AM6:26 PM
28 जनवरी 202505:48 AM6:26 PM

Shab E Meraj History In Hindi (शब ए मेराज का इतिहास)

इस्लामिक मान्यताओं अनुसार ये वही रात है जब हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने मक्का से येरुशलम की बैत अल मुकद्दस मस्जिद तक का सफर तय किया था और इसके बाद सातों आसमान की सैर करते हुए उनकी अल्लाह से मुलाकात हुई थी। इसलिए इस रात को पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। इस दिन कई मुस्लिम लोग रोजा रखता हैं। हालांकि रमजान महीने की तरह इस दिन रोजा रखना सभी के लिए अनिवार्य नहीं होता। बता दें शब-ए-मेराज में शब का मतलब रात से होता है और मेराज का मतलब आसमान है।

How To Celebrate Shab E Meraj (शब ए मेराज कैसे मनाते हैं)

मुसलमान लोग इस रात को कुरान शरीफ पढ़ते हैं और विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। इसके अलावा इस रात को मक्का मदीना समेत दुनिया की कई मस्जिदों को रोशनी से सजाया जाता है। कई मुस्लिम लोग इस दिन रोजा भी रखते हैं।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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