अध्यात्म

sawan purnima 2025: सावन पूर्णिमा पर ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न, सात पुश्तों का नहीं सताएगी धन की कमी

sawan purnima 2025: आज सावन की पूर्णिमा है। पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और अगर आप पूर्णिमा के दिन विष्णु जी को प्रसन्न कर लेते हैं तो आपके जीवन से धन-धान्य की परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। यहां एक ऐसा अचूक तरीका दिया गया है, जिससे आप विष्णु भगवान को आसानी से खुश कर सकते हैं।

सावन पूर्णिमा 2025 पर ऐसे करें विष्णु जी को प्रसन्न (photo source: AI)

sawan purnima 2025: पूर्णिमा का दिन खास होता है, वो भी खासतौर से सावन महीने की पूर्णिमा तो विशेष होती है। इस दिन स्नान-दान किया जाता है। भक्त व्रत भी रखते हैं और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने की पूरी कोशिश करते हैं। विष्णु भगवान से आशीर्वाद पाने के लिए आप एक खास उपाय कर सकते हैं। ये उपाय है विष्णु चालीसा का पाठ। आज इस पाठ को करने से विष्णु जी की कृपा बरसेगी और घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।

Vishnu Chalisha In Sanskrit-

।।विष्णु चालीसा का पाठ।।

''दोहा''

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।

कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।

तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥

शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।

करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।

भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥

आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।

धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।

देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।

शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।

मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।

हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।

गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥

हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।

देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥

चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।

जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥

शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।

करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।

सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥

दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।

पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।

निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥

॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥

Vishnu Chalisha In Hindi-

विष्णु चालीसा अर्थ-

हे सृष्टि के संचालनकर्ता!! भगवान विष्णु!! अपने सेवक के मन को जानिए। आज आपका भक्त आपके बारे में इस विष्णु चालीसा के माध्यम से वर्णन कर रहा है, कृपया उसे ज्ञान दीजिए। भगवान विष्णु सभी कष्टों व दुखो का नाश करते हैं और सभी का उद्धार करते हैं, उन्हें हम सभी का नमन है। आपकी शक्ति संपूर्ण सृष्टि में सबसे शक्तिशाली है और आपका उत्कर्ष तीनों लोकों में व्याप्त हो रहा है। आपका रूप बहुत ही सुंदर, मन को मोह लेने वाला है और आपका स्वभाव एकदम सरल है। आप अपने रूप से सभी का मन मोह लेते हो। आपने अपने तन पर पीले रंग के वस्त्र पहने हुए हैं और गले में बैजंती की माला सुशोभित है। आपने अपने हाथों में शंख, सुदर्शन चक्र, गदा पकड़े हुए हैं जिन्हें देखकर असुरों में भय व्याप्त रहता है। आपके कारण ही इस सृष्टि में सत्य, धर्म इत्यादि की विजय रहती है और काम, क्रोध, मद, लोभ इत्यादि का नाश होता है। आप ही संतों, ऋषि-मुनि, सज्जन मनुष्यों की रक्षा करते हो और उनके मन को आनंदित करते हो तो वहीं दूसरी ओर, आप ही असुर, दैत्य व राक्षसों का नाश करते हो। आप ही सुख प्रदान करने वाले हैं और आप ही हम सभी के कष्टों को हरने वाले हैं। आप ही हमारी कमियों को दूर करने वाले हैं और आप ही हमे सद्पुरुष बनाने वाले हैं। भगवान विष्णु के द्वारा ही अपन भक्तों के पापों को नष्ट कर उनका उद्धार किया जाता है और उनके कष्ट दूर कर उन्हें भव सागर पार करवाया जाता है। पृथ्वी पर धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने समय-समय पर कई अवतार लिए हैं और अपने भक्तों का उद्धार किया है। त्रेतायुग में पृथ्वी पर जब राक्षसों का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया और आपके भक्तों ने आपको पुकारा तो आप श्रीराम का रूप धारण कर पृथ्वी पर अवतरित हुए। श्रीराम के रूप में आपने राक्षसों के राजा रावण का उसके संपूर्ण कुल व राक्षस सेना के साथ नाश कर दिया और धरती का भार हल्का किया। हिरण्याक्ष के द्वारा पृथ्वी को समुंद्र में डुबो देने के कारण आपने वराह रूप धारण कर पृथ्वी की रक्षा की व हिरण्याक्ष राक्षस का वध किया। पिछले कल्प के अंत समय में आप मत्स्य रूप धरकर उस कल्प से चौदह रत्नों को बचाकर इस कल्प में लेकर आये और अपनी महिमा को दिखाया। समुंद्र मंथन के समय जब असुरों के द्वारा अमृतपान के लिए अत्यधिक उत्पाद मचाया गया तब आपने मोहिनी रूप धरा। मोहिनी रूप में आपने देवताओं को अमृत पिलाया जबकि असुरों को अपने रूप में बहलाकर रखा। समुंद्र मंथन के लिए आपने कुर्म अवतार धारण किया और मंदराचल पर्वत का भार उठाया। भगवान शिव जब भस्मासुर को दिए वरदान से परेशान हो गए तब आप ने ही स्त्री रूप धरकर भस्मासुर का अंत किया। जब राक्षसों के द्वारा भगवान ब्रह्मा से वेदों को चुराकर समुंद्र में डुबो दिया गया तब आप ही हयग्रीव अवतार में वेदों को पुनः लेकर आये। आपने स्त्री रूप में भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए तैयार किया और उसी के वरदान से उसे भस्म कर दिया। एक बार जलंधर राक्षस ने अत्यधिक आंतक मचा दिया और भगवान शिव के साथ भयंकर युद्ध किया। भगवन शिव ने जलंधर से भीषण युद्ध किया लेकिन उसकी पत्नी वृंदा के तप के कारण उसे पराजित नही कर सके और यह देखकर माता सती परेशान हो उठी। इसके पश्चात माता सती ने आपको ही याद किया और सब समस्या आपको बताई। माता सती के आग्रह पर आपने वृंदा की तपस्या को भंग करने के लिए जलंधर का रूप धरा और वृंदा के पास गए। वृंदा ने जब आपको देखा तो वह भी भ्रम में पड़ गयी और अपनी तपस्या छोड़कर आपके पास आ गयी। माता वृंदा के स्पर्श से आपने अपनी गलती भी स्वीकार की और उन्हें सदैव अपने साथ माता तुलसी के रूप में पूजने का आशीर्वाद दिया और दूसरी ओर, भगवान शिव ने जलंधर का वध कर दिया। आप ही ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए उसके पिता हिरन्यकश्यप का नरसिंह अवतार में वध किया। आपने अपने अनेक गण, भक्त इत्यादि का उद्धार किया है और उन्हें भव सागर पार लगाया है। हे भगवन विष्णु!! कृपा हमारे दुखों का भी अंत कीजिए और हम पर अपनी कृपा दृष्टि बनाइए। मैं प्रतिदिन ही आपके दर्शन करता हूँ। आप ही याचकों, निर्धनों, भक्तों के लिए शुभ फल देने वाले हैं। आपका सेवक आपके दर्शन करने से बहुत खुश है और वह आपसे अपने ऊपर कृपा रखने की याचना कर रहा है। मैं नादान हूँ प्रभु और इतना तप-यज्ञ के बारे में नही जानता, मैं केवल आपका ही स्मरण करता हूँ। मुझ पर अपनी दया दिखाइए प्रभु और मुझे व्रत इत्यादि विधि के बारे में इतना पता नही है। मैं अज्ञानी आपका किस विधि के अनुरूप पूजन करूँ, अज्ञानता में मुझसे कोई भूल ना हो जाए अन्यथा इसका दुःख बहुत भीषण होगा। मैं आपको विधिपूर्वक प्रणाम करता हूँ और आपके सामने अपना संपूर्ण समर्पण करता हूँ। देवताओं, ऋषि-मुनियों ने सदैव ही आपकी सेवा की है और परम हर्ष को प्राप्त किया है। आपने सदा ही दीन, दुखियों इत्यादि पर अपनी कृपा दृष्टि रखी है और उन्हें अपना बनाया है। आप ही हम सभी के पाप, दोष, कमियों को दूर करने वाले हो और हमे सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त कर हमारा उद्धार करने वाले हो। आप ही हमे संतान, संपत्ति देकर सुख देते हो और अब हमे अपने चरणों का दास बनाकर हमे मुक्त कीजिए। निगम सदा ही सभी से यह प्रार्थना करता है कि जो कोई भी यह विष्णु चालीसा पढ़ता है या दूसरों को सुनाता है, वह सदैव सुख पाता है।

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Srishti
Srishti Author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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