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Satuan Parv Kab Hai 2026: आज सतुआन संक्रांति है क्या, जानें सत्तू पर्व की सही डेट और इसकी पूजा विधि

Satuan Parv Kab Hai 2026 (सतुआन कब है 2026 में): मेष संक्रांति के दिन सतुआन यानी सत्तू पर्व मनाया जाता है। इस दिन खरमास खत्म हो जाता है और शुभ काम शुरू हो जाते हैं। इस त्योहार के जरिए लोग गर्मी के मौसम के लिए तैयार होते हैं। यहां से आप जान सकते हैं कि अप्रैल में सुतआन कब है।

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सतुआन कब है 2026 में (pc: pinterest)

Satuan Parv Kab Hai 2026 (सतुआन कब है 2026 में): देशभर में सतुआन मनाने की तैयारी चल रही है। इसे सत्तू पर्व और सत्तू संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। ये यूपी, बिहार और झारखंड में खासतौर से मनाया जाता है। ये पर्व गर्मियों की शुरुआत और नई फसल आने का प्रतीक है। मान्यता के अनुसार, इस दिन सत्तू का सेवन और पूजा-पाठ की जाती है। तो इस साल सतुआन कब मनाया जाएगा, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां सतुआन की सही डेट, मुहूर्त और साथ ही साथ इससे जुड़ी कई अन्य जानकारियां मौजूद है।

सतुआन 2026 डेट (Satuan 2026 Date)-

सतुआन का त्योहार इस साल 14 अप्रैल 2026, दिन मंगलवार को मनाया जा रहा है।

सतुआन 2026 डेट और मुहूर्त (Satuan 2026 Muhurat)-

पुण्य काल मुहूर्त: सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक।

सतुआन पूजा विधि (Satuan Puja Vidhi In Hindi)-

सतुआन के पर्व से ठीक एक दिन पहले मिट्टी के घड़े में जल को ढक्कर रखा जाता है। फिर इस पर्व की सुबह पूरे घर में उसी जल से पवित्र छिड़काव करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बासी जल के छींटों से पूरा घर शुद्ध हो जाता है। इसके अलावा इस दिन बासी खाना खाने की भी परंपरा है। कहते हैं कि जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तो उसके पुण्यकाल में सूर्य और चंद्र की किरणों से अमृत बरसता है, जो आरोग्यवर्धक होता है।

सतुआन के दिन क्या खाते हैं (Satuan Ke Din Kya Khate Hai)-

  • सत्तू
  • कच्चे आम
  • मूली
  • गुड़

सतुआन के दिन क्या करते हैं? (Satuan Ke Din Kya Karte Hai)-

इस दिन लोग तुलसी के पेड़ को नियमित जल देने के लिए एक घड़ा बांध देते हैं। ऐसा करने के पीछे की मान्यता है कि इससे पितरों की प्यास बुझ जाती है। इस दिन सुबह के समय माताएं अपने बच्चों के सिर पर पानी का थापा देती हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे बच्चों पर पूरे साल शीतलता बनी रहती है। जिससे गर्मी से राहत मिलती है। इस दिन शाम के समय में लोग पेड़-पौधों में जल डालते हैं जिससे वे सूखे नहीं। इसके अलावा इस दिन कई घरों में कुलदेवता की पूजा की जाती है और उन्हें आटा, सत्तू, शीतल पेय, आम्रफल और पंखा अर्पित किया जाता है। पर्व के दूसरे दिन धुरलेख होता है। इस दिन सभी लोग मिलकर जल संग्रह के स्थलों जैसे कि कुआं, तालाब की सफाई करते हैं। इस दिन चूल्हे को आराम दिया जाता है। इस दिन रात में मंसाहार खाने की परंपरा है।

सतुआन के दिन दान (Satual Ke Din Kya Daan Kare)-

कहते हैं सतुआन पर्व पर घड़े का दान करने से खूब पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा इस दिन सत्तू, गुड़, हाथ वाला पंखा, चप्पल और छाता दान करना भी बेहद पुण्य का काम माना गया है।

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Srishti
सृष्टि author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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