अध्यात्म

आज सर्व पितृ अमावस्या के दिन करें इस स्त्रोत का पाठ, पलभर में मिलेगा पितृदोष से छुटकारा

Sarva Pitru Amavasya 2025: सनातन धर्म में पितृ पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया है जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष में किसी कारण से नहीं कर पाए है। पंचांग के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या आज यानी 21 सितंबर को है और यहां दिए स्त्रोत को पढ़कर आप पितृ दोष से मुक्ति पा सकते हैं।

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सर्व पितृ अमावस्या 2025 पितृ दोष निवारण स्त्रोत (pic credit: iStock)

Sarva Pitru Amavasya 2025: आज सर्व पितृ अमावस्या है। इसे महालय अमावस्या भी कहते हैं। यह दिन पितरों यानी पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धा, तर्पण, और पिंडदान किया जाता है। जिन्हें अपने पितरों की मृत्यु तिथि याद नहीं होती, वो लोग सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धा-भाव से श्राद्ध करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तर्पण और कुछ खास स्त्रोत का पाठ करने से संतुष्ट पितर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि, संतान और आरोग्य प्रदान करते हैं। बता दें कि सर्व पितृ अमावस्या के दिन पूजा के दौरान पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ भी जरूर किया जाता है। इस पाठ को करने से पितृ दोष खत्म होता है। यहां से आप पितृ स्तोत्र और पितृ कवच के लिरिक्स देख सकते हैं।

।।पितृ स्तोत्र ।।

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ।।

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।

सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् । ।

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।

तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।

द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।

अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।

योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।

स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।

अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय: ।

जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस: ।

नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

।।पितृ कवच।।

पितृ दोष निवारण के लिए इस कवच का रोजाना जाप करना चाहिए।

कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।

तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥

तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।

तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥

प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।

यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥

उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।

यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥

ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।

अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।

Srishti
सृष्टि author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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