Sankashti Chaturthi 2025 Muhurat, Mantra And Puja Vidhi: संकष्टी चतुर्थी का शाब्दिक अर्थ है 'संकटों को हरने वाली चतुर्थी'। स दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। यह व्रत संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य लाभ और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से चंद्र देवी की भी कृपा मिलती है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त (Sankashti Chaturthi Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 जून को दोपहर 3:46 बजे शुरू होकर 15 जून को दोपहर 3:51 बजे तक रहेगी। आप इस अवधि में विघ्नहर्ता की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी मंत्र और पूजा विधि (Photo Source: Canva)
संकष्टी चतुर्थी पूजा मंत्र (Sankashti Chaturthi Puja Mantra)
- ॐ गं गणपतये नमः
- ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। इसके बाद पूजा घर को गंगाजल से शुद्ध करें और एक वेदी पर लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल और चावल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान गणेश का अभिषेक करें। घी का दीपक प्रज्वलित करें। भगवान गणेश को लाल फूल, दूर्वा, रोली और चंदन आदि चीजें चढ़ाएं। उन्हें मोदक, लड्डू, फल और अन्य मिठाई का भोग लगाएं। भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें। संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। अंत में भगवान गणेश की आरती करें। शाम के समय चंद्रमा दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य दें। अंत में पूजा के लिए माफी मांगे।
