अध्यात्म

सद्गुरु से बताया रुद्राक्ष पहनने का अद्भुत लाभ, जानें रुद्राक्ष की महिमा और आध्यात्मिक महत्व

  • Authored by: Srishti
  • Updated Jan 21, 2026, 05:32 PM IST

Benefits Of Wearing Rudraksh: रुद्राक्ष, जिसे भगवान शिव के आंसू कहा जाता है, केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक उपकरण भी है। सद्गुरु के अनुसार, रुद्राक्ष की अद्वितीय तरंगें मानव ऊर्जा के साथ मेल खाती हैं, जिससे मानसिक स्थिरता और शांति मिलती है। यह साधकों के लिए ही नहीं, बल्कि तनाव और दबाव का सामना कर रहे सभी के लिए फायदेमंद है। रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति की ऊर्जा में सकारात्मक बदलाव आता है, जो उसे ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

Sadhguru Explains Benefits Of Wearing Rudraksh

सद्गुरु से जानें रुद्राक्ष पहनने के अद्भुत फायदे (pc: pinterest)

Benefits Of Wearing Rudraksh: रुद्राक्ष, जिसे हम अक्सर धार्मिकता से जोड़ते हैं, का वास्तविक महत्व विज्ञान और मानव जीवन के संदर्भ में भी है। सद्गुरु के अनुसार, रुद्राक्ष केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक उपकरण है जो मानव प्रणाली के साथ काम करता है। रुद्राक्ष का नाम संस्कृत के दो शब्दों "रुद्र" (भगवान शिव) और अक्ष (आंख) से आया है, जिसका अर्थ है भगवान शिव के आंसू।

कैसे हुई रुद्राक्ष के उत्पत्ति?

कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने एक बार ध्यान में लीन होकर बहुत समय बिताया और उनकी आंखों से आंसू गिरने लगे। ये आंसू जब धरती पर गिरे, तो रुद्राक्ष का जन्म हुआ। सद्गुरु का मानना है कि रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और मानसिक शांति आती है। उनका कहना है कि रुद्राक्ष की एक अद्वितीय तरंग होती है, जो व्यक्ति की ऊर्जा के साथ मेल खाती है।

सद्गुरु और सांप की कहानी-

सद्गुरु ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया, 'जब मैं 10, 11 साल का था, तो मैं जंगल में, चामुंडी हिल और दूसरी जगहों पर बहुत समय बिताता था। अगर मैं बस एक जगह बैठ जाता, तो एक दोपहर में 5 से 10 कोबरा पकड़ लेता था। एक वजह यह थी कि मैंने इसके लिए एक खास स्किल डेवलप कर ली थी। उन्होंने आगे बताया कि बाद में उन्हें एहसास हुआ कि ये सांप उनकी तरफ आ रहे थे, न कि वह उन्हें ढूंढ रहे थे। कई बार मेरे साथ ऐसा हुआ है कि जब मैं जंगल में था और बस चुपचाप बैठा था, खासकर दोपहर में दो से पाँच बजे के बीच, जब मैं दोबारा आँखें खोलता था, तो मेरे आस-पास कम से कम पाँच से आठ कोबरा होते थे। जिस पल आप मेडिटेटिव हो जाते हैं, वे आपकी तरफ खींचे चले आते हैं।'

रुद्राक्ष की शक्ति-

सद्गुरु ने कहा कि जब कोई व्यक्ति ध्यान में होता है, तो उसकी ऊर्जा वातावरण को आकर्षित करती है। रुद्राक्ष भी इसी प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करता है, जिससे यह पहनने वाले के साथ एकाकार हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि रुद्राक्ष को पहनने के बाद, यदि किसी व्यक्ति ने इसे कुछ समय के लिए हटा दिया, तो उसे ऐसा महसूस होगा कि जैसे उसके शरीर का एक हिस्सा गायब हो गया है। यह रुद्राक्ष का शरीर के साथ मेलजोल दर्शाता है।

रुद्राक्ष पहनने का लाभ-

सद्गुरु का मुख्य संदेश यह है कि रुद्राक्ष केवल साधकों या योगियों के लिए नहीं है, बल्कि यह आधुनिक जीवन में तनाव और मानसिक दबाव का सामना कर रहे सभी लोगों के लिए फायदेमंद है। चाहे वह एक पेशेवर हो या एक छात्र, रुद्राक्ष पहनना उन्हें ध्यान केंद्रित करने और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने में मदद कर सकता है। इस प्रकार, रुद्राक्ष एक साधारण लेकिन प्रभावी साधन है, जो आज के तनावपूर्ण समय में मानसिक शांति और संतुलन प्रदान कर सकता है। इसे पहनना न केवल एक धार्मिक कार्य है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी है।

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Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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