अध्यात्म

रावण दहन देखना शुभ या अशुभ? इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं देखना चाहिए रावण दहन, जानें रावण दहन से जुड़े नियम

Ravan Dahan Dekhne Ke Niyam: रावण दहन अहंकार, अधर्म और अनीति पर धर्म, सत्य और अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आज देशभर में रावण दहन का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि क्या रावण दहन देखना शुभ है? और किन लोगों को रावण दहन नहीं देखना चाहिए।

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इन 5 लोगों को नहीं देखना चाहिए रावण दहन (pic credit: iStock)

Ravan Dahan Dekhne Ke Niyam: हर साल आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण दहन मनाया जाता है। ये भारत का एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो असत्य पर सत्य की, अधर्म पर धर्म की, और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आज दशहरा है और देशभर में रावण दहन किया जा रहा है। बड़े बड़े मैदानों में रावण का पुतला जलाया जाता है। लेकिन रावण दहन देखना चाहिए या नहीं, इसके बारे में आप यहां से जान सकते हैं।

रावण दहन देखना चाहिए या नहीं?

रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत है, इसलिए रावण दहन जरूर देखना चाहिए। वहीं, वेद- पुराणों की माने तो रावण दहन नहीं देखना चाहिेए। क्योंकि एक शव को जलाने की जो प्रक्रिया होती है, ठीक वही प्रक्रिया रावण दहन में भी की जाती है, इसलिए ये देखना शुभ नहीं माता जाता है।

किन 5 लोगों को नहीं देखना चाहिए रावण दहन?

  1. गर्भवती महिलाएं को रावण दहन नहीं देखना चाहिए।
  2. नवविवाहित जोड़ा, जिनकी शादी को 1 साल भी नहीं हुए हैं उन्हें रावण दहन नहीं देखना चाहिए।
  3. नवजात शिशू और छोटे बच्चे को रावण दहन नहीं देखना चाहिए।
  4. बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति को रावण दहन नहीं देखना चाहिए।
  5. मासिक धर्म के दौरान लड़कियों को रावण दहन नहीं देखना चाहिए।

रावण की लकड़ी लाने से क्या होता है?

रावण दहन होने के बाद भूलकर भी जली हुई लकड़ी और राख को घर पर नहीं लाना चाहिए। इससे घर की सुख-शांति चली जाती है और गृह क्लेश बढ़ जाते हैं।

क्या रावण दहन देखने के बाद स्नान करना चाहिए?

रावण दहन देखने के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान जरूर करना चाहिए। बिना स्नान किए घर में प्रवेश न करें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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