Rath Saptami 2026: आज रथ सप्तमी पर कितने बजे करें पूजा, जानिए क्या है सूर्यदेव की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 25, 2026, 07:31 AM IST
Rath Saptami 2026: सनातन धर्म में सूर्यदेव को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन शक्ति का स्रोत माना गया है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला रथ सप्तमी का पर्व सूर्यदेव की इसी दिव्य शक्ति को समर्पित है। इसको अचला सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आरूढ़ होकर आकाश में प्रकट हुए थे। आइए जानते हैं कि आज पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
रथ सप्तमी पर कैसे करें पूजन
Rath Saptami 2026: माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित है और इसे सूर्य उपासना का विशेष दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि पर सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर आकाश में प्रकट हुए थे, इसलिए इसे रथ सप्तमी कहा जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को अचला सप्तमी के नाम से भी जाना गया है।
रथ सप्तमी को सूर्य के उत्तरायण काल से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन से सूर्य की ऊर्जा और तेज में वृद्धि होती है, जिसका सीधा प्रभाव पृथ्वी और मानव जीवन पर पड़ता है। इसी कारण यह पर्व स्वास्थ्य, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा हुआ माना गया है। रथ सप्तमी के दिन किया गया स्नान, दान और सूर्य पूजन विशेष पुण्य फल देने वाला माना जाता है।
रथ सप्तमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 25 जनवरी 2026 को पड़ रही है। तिथि की शुरुआत 24 जनवरी की रात 12 बजकर 40 मिनट से हो चुकी है। इसका समापन 25 जनवरी की रात 11 बजकर 10 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 25 जनवरी 2026 को ही रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही व्रत भी रखा जाएगा।
रथ सप्तमी 2026 पर पूजन का शुभ मुहूर्त
रथ सप्तमी के दिन प्रातःकाल स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान का शुभ समय सुबह 05 बजकर 26 मिनट से 07 बजकर 13 मिनट तक माना गया है। इस दौरान स्नान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
सूर्य पूजन के लिए दिन में कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह 08 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 56 मिनट तक का समय पूजा के लिए अनुकूल माना गया है। इसके बाद 09 बजकर 56 मिनट से 11 बजकर 17 मिनट तक भी सूर्य आराधना की जा सकती है। दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 17 मिनट से 01 बजकर 00 मिनट तक रहेगा, जिसे विशेष फलदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त दोपहर 02 बजकर 00 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक भी पूजा का शुभ समय है।
रथ सप्तमी की पूजा विधि
रथ सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि नदी या सरोवर में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्यदेव का ध्यान किया जाता है।
इसके बाद तांबे के पात्र या दीपक में तिल का तेल डालकर दीप प्रज्वलित किया जाता है। सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय श्रद्धा भाव से मंत्रों का जप किया जाता है। सूर्यदेव को लाल पुष्प, कुमकुम और अक्षत अर्पित करना शुभ माना गया है। पूजा के अंत में गुड़, तिल और घी का दान करने की परंपरा है। इस दौरान 'ॐ सूर्याय नमः, ॐ घृणि सूर्याय नमः, या ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' मंत्रों का जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन निर्जला व्रत किया जाता है। हालांकि, जो लोग निर्जला व्रत न कर सकें, वे फल और दूध ग्रहण कर सकते हैं। अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है।
रथ सप्तमी का धार्मिक महत्व
रथ सप्तमी को सूर्यलोक की प्राप्ति और रोगों से मुक्ति का पर्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। कहा जाता है कि रथ सप्तमी पर किया गया स्नान और सूर्य पूजन, गंगा स्नान के समान पुण्य प्रदान करता है।
पुराणों के अनुसार, सूर्यदेव को आरोग्य, तेज, आत्मबल और दीर्घायु का कारक माना गया है। इसलिए रथ सप्तमी का व्रत विशेष रूप से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से मुक्ति के लिए किया जाता है। यह पर्व जीवन में स्थिरता और सकारात्मक सोच को बढ़ाने वाला माना जाता है।
रथ सप्तमी के पूजन से मिलते हैं ये लाभ
रथ सप्तमी का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं। मान्यता है कि सूर्यदेव की कृपा से नेत्र रोग, त्वचा रोग और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह व्रत मानसिक तनाव को कम करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ सप्तमी पर सूर्य पूजन करने से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और कार्यक्षेत्र में स्थिरता आती है। यह व्रत पापों से मुक्ति और पुण्य की वृद्धि का माध्यम माना गया है। साथ ही, यह पर्व व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, नियमितता और सकारात्मक दृष्टिकोण को मजबूत करता है।