Ratanti Kali Puja 2026: क्यों खास है रटन्ती काली पूजा, जानिए क्या है इस पूजा के लाभ?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 17, 2026, 09:32 PM IST
Ratanti Kali Puja 2026:माघ माह की चतुर्दशी तिथि को रटन्तीकाली पूजा होती है। इस दिन मां काली के लिए इस स्वरूप की पूजा बेहद ही फलदायी मानी जाती है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने रटन्तीकाली पूजा की सुबह स्वर्ग से देवताओं को आते हुए देखा था। बंगाल और ओडिशा में लोग सुख और दांपत्य जीवन में खुशी व नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए मां की पूजा करते हैं।
रटन्ती काली पूजा क्या है
Ratanti Kali Puja 2026: सनातन धर्म में मां काली की आराधना का विशेष महत्व है। वर्ष भर अलग-अलग तिथियों पर मां काली के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण पूजा है रटन्तीकाली पूजा, जो माघ मास की चतुर्दशी तिथि को की जाती है। मान्यता है कि इस तिथि पर श्रद्धा और निष्ठा से मां काली की उपासना करने से वे अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनती हैं। इसी कारण इस दिन कई मंदिरों के साथ-साथ अनेक घरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
रटन्तीकाली पूजा हिंदू धर्म की एक प्राचीन और रहस्यमयी पूजा है, जो मुख्य रूप से बंगाल, बिहार, ओडिशा और पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यह मां काली की उपासना का विशेष रूप है, जो सामान्य काली पूजा से अलग होती है। जहां ज्यादातर काली पूजा अमावस्या पर होती है, वहीं रटन्तीकाली पूजा कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर की जाती है। 2026 में यह पूजा जनवरी में मनाई जाएगी, और यह पितरों की शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत प्रभावशाली मानी जाती है।
रटन्तीकाली पूजा क्या है?
रटन्तीकाली पूजा मां काली की वह आराधना है जो माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी पर की जाती है। काली माता को तंत्र-मंत्र की देवी माना जाता है, और इस पूजा में उनकी रौद्र रूप की बजाय रात्रि शक्ति और रहस्यमयी स्वरूप की उपासना की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से दक्षिणेश्वर काली मंदिर (कोलकाता) में प्रसिद्ध है, जहां साल में तीन प्रमुख काली पूजाओं में से एक रटन्तीकाली पूजा है।
मान्यता है कि इस रात मां काली की शक्ति चरम पर होती है, और भक्तों को पितृ दोष, काले जादू या नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति मिलती है। यह पूजा रटन्तीचतुर्दशी के नाम से भी जानी जाती है, और इसमें मौन, ध्यान और तांत्रिक विधियां शामिल होती हैं।
रटन्तीकाली पूजा 2026 कब है?
वर्ष 2026 में रटन्तीकाली पूजा 17 जनवरी (शनिवार) को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार, माघ मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी की रात से शुरू होकर 17 जनवरी तक रहेगी। पूजा मुख्य रूप से रात्रि में की जाती है, जब चतुर्दशी तिथि का प्रभाव पूर्ण होता है।
पूजा का समय शाम से रात्रि तक रहता है। माघ मास की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी की रात 10 बजकर 32 मिनट से 17 जनवरी की रात 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। इसके बाद 17 जनवरी की रात 12 बजकर 14 मिनट से 18 जनवरी की रात 1 बजकर 30 मिनट तक अमावस्या तिथि रहेगी।वर्ष 2026 में रटन्तीकाली पूजा 17 जनवरी, शनिवार को मनाई जाएगी। रटन्तीकाली पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
2026 में रटन्तीकाली पूजा के लिए मुख्य मुहूर्त शाम से रात्रि तक है। पूजा प्रारंभ शाम 05:45 बजे सूर्यास्त के बाद है। मुख्य मुहूर्त रात्रि 08:00 से 10:00 बजे तक है।
दक्षिणेश्वर में रटन्तीकाली पूजा
दक्षिणेश्वर काली मंदिर में वर्ष में तीन काली पूजा अत्यंत भव्य रूप से मनाई जाती हैं। इनमें फलहारिणी, दीपान्विता और रटन्तीकाली पूजा मुख्य हैं। इनमें रटन्तीकाली पूजा माघ मास में चतुर्दशी तिथि को होती है, जबकि अन्य काली पूजाएं अमावस्या को होती हैं। इस दिन दक्षिणेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं और गंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं।
रामकृष्ण परमहंस से जुड़ी है एक मान्यता
माना जाता है कि श्रीरामकृष्ण परमहंस ने रटन्ती काली पूजा की भोर में दक्षिणेश्वर की गंगा में स्वर्ग से देवताओं को स्नान के लिए उतरते हुए देखा था। उन्होंने कहा था कि रटन्ती काली पूजा की सुबह गंगा तट पर दिव्य दृश्य प्रकट होता है। इसी मान्यता के कारण आज भी इस दिन दक्षिणेश्वर के गंगा घाट पर बड़ी संख्या में भक्त पुण्य स्नान करते हैं। कालीघाट सहित अन्य प्रमुख काली मंदिरों में भी इस दिन मां काली को विशेष श्रृंगार से सजाया जाता है।
राधा-कृष्ण से जुड़ी मां की कथा
एक लोक कथा के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण की प्रेम लीलाओं में राधा पूर्ण रूप से तल्लीन थीं। उसी समय गोपियों ने बांसुरी की मधुर ध्वनि सुनी और वन की ओर दौड़ीं। वहां उन्होंने अपने इष्ट रूप को देखा और समझा कि श्रीराधा ही साक्षात आद्यशक्ति हैं। जब उन्होंने इस दर्शन को किया था, उस दिन माघ माह के चतुर्दशी की रात्रि थी। इस कारण इस पूजा को इस दिन किया जाता है।
रटन्ती काली पूजा के लाभ और सावधानियां
यह पूजा से पितृ दोष, काले जादू, नकारात्मक ऊर्जा और ग्रह पीड़ा दूर होती है। महिलाओं के लिए सौभाग्य वृद्धि और पुरुषों के लिए शक्ति प्राप्ति का दिन है। पूजा शुद्ध मन से करें, मांस-मदिरा से दूर रहें, और तांत्रिक विधियां केवल गुरु मार्गदर्शन में करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।