अध्यात्म

रमजान में हर मुसलमान को करने चाहिए ये 5 काम, रोजा रखने के साथ हैं बेहद जरूरी

Ramzan Mein Roze Ke Saath Kya Zaruri Hai: इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पाक महीना रमजान है। जो 19 फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रमजान में कुछ ऐसे भी काम हैं, जो रोजे जैसे ही महत्वपूर्ण हैं। आइए जानते हैं कि वे काम कौन से हैं?

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रमजान में क्या करना चाहिए

Ramzan Mein Roze Ke Saath Kya Zaruri Hai: रमजान का महीना बेहद ही पाक माना गयाा है। साल 2026 में रमजान 19 फरवरी से शुरू हो चुके हैं। अभी रमजान का पहला अशरा चल रहा है। सूरह अल-बकरा 2:185 के अनुसार रमजान का महीना वह है जिसमें कुरआन नाजिल किया गया, जो लोगों के लिए हिदायत है और सही-गलत में फर्क बताने वाला है। इस कारण रमजान सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि हिदायत और आत्म-सुधार का महीना है।

सूरह अल-बकरा 2:183 के अनुसार ‘ऐ ईमान वालो! तुम पर रोजे फर्ज किए गए हैं जैसे तुमसे पहले लोगों पर किए गए थे, ताकि तुम तकवा हासिल करो।’ यानी रोजे का मकसद तकवा और चरित्र निर्माण है। रमजान इंसान को अनुशासन, सब्र और अपने व्यवहार को सुधारने की ट्रेनिंग देता है।

सहीह बुखारी के अनुसार पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जो व्यक्ति रोजा रखते हुए झूठ बोलना और बुरे काम नहीं छोड़ता, अल्लाह को उसके भूखे-प्यासे रहने की कोई जरूरत नहीं है। इससे साफ है कि रोजा केवल खाने-पीने से रुकने का नाम नहीं, बल्कि अपने व्यवहार को सुधारने का नाम है। इसी कारण इस दौरान रोजे के जैसे ही कुछ और भी काम जरूरी माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि वे क्या हैं?

नमाज और तरावीह

रोजे के साथ नमाज की पाबंदी बहुत जरूरी है। रमजान में तरावीह की नमाज खास इबादत है। सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम के अनुसार जो व्यक्ति ईमान और सवाब की नीयत से रमजान की रातों में नमाज पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। इसलिए रमजान में सिर्फ दिन का रोजा नहीं, बल्कि रात की इबादत भी अहम है।

तरावीह में पूरा कुरआन सुनने का मौका मिलता है। इससे इंसान का दिल कुरआन से जुड़ता है और वह उसके संदेश को समझने की कोशिश करता है। पांच वक्त की नमाज और तरावीह को रोजे के साथ जरूर शामिल करना चाहिए।

कुरआन की तिलावत और लैलतुल कद्र

सूरह अल-कद्र 97:3 के अनुसार लैलतुल कद्र हजार महीनों से बेहतर है। यह रात रमजान के आखिरी दस दिनों में तलाश की जाती है। रमजान कुरआन से जुड़ने का महीना है। रोज थोड़ा-थोड़ा कुरआन पढ़ना, उसका मतलब समझना और उस पर अमल करना रमजान का असली फायदा है। कुरआन सिर्फ पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि जिंदगी जीने का तरीका सिखाने वाली किताब है।

सदका, जकात और फितरा

सूरह अल-बकरा 2:261 के अनुसार जो लोग अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, उनका सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।

रमजान में जकात करना बहुत अहम है। अगर आपका माल निसाब तक पहुंच चुका है और साल पूरा हो गया है, तो जकात देना फर्ज है। ईद की नमाज से पहले फितरा देना जरूरी है, ताकि गरीब लोग भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें। सदका और जकात से समाज में बराबरी और भाईचारा बढ़ता है।

दुआ और इस्तगफार

सूरह अल-बकरा 2:186 के अनुसार ‘जब मेरा बंदा मुझे पुकारता है तो मैं उसकी दुआ कबूल करता हूं। इसलिए रमजान में ज्यादा से ज्यादा दुआ करनी चाहिए।’

सुनन इब्न माजा और जामे तिर्मिज़ी के अनुसार रोजेदार की दुआ रद्द नहीं की जाती, खास तौर पर इफ्तार के वक्त दुआ की कबूलियत की उम्मीद ज्यादा होती है।

लैलतुल कद्र की दुआ के बारे में हदीस में बताया गया है कि ‘अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फअ्फु अन्नी’ पढ़नी चाहिए। यह दुआ गुनाहों की माफी मांगने की दुआ है।

आखिरी दस दिन और इतिकाफ

सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम के अनुसार पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमजान के आखिरी दस दिनों में इतिकाफ करते थे। यह सुन्नत अमल है। इन दिनों में तरावीह, तहज्जुद और कुरआन की तिलावत बढ़ा देनी चाहिए और लैलतुल कद्र की तलाश करनी चाहिए।

रमजान को मुकम्मल कैसे बनाएं

रमजान रोजे से शुरू होता है, लेकिन नमाज, कुरआन, दान, दुआ और अच्छे व्यवहार से पूरा होता है। अगर इंसान सिर्फ भूख और प्यास सह ले और अपने चरित्र में बदलाव न लाए, तो रमजान का मकसद अधूरा रह जाता है। इस कारण रोजे के साथ नमाज की पाबंदी करें, कुरआन पढ़ें, जरूरतमंदों की मदद करें और अल्लाह से माफी मांगते रहें। यही रमजान की असली बरकत है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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