अध्यात्म

रमजान 2026 का 7वां रोजा आज, जानिए क्या होता है इस दिन खास और कैसे करें खुदा की इबादत

Ramzan 2026, 7th Roza : 25 फरवरी को रमजान का सातवां रोजा रखा जा रहा है। रमजान महीने का हर दिन अपने में खास होता है। इसी प्रकार आज सातवां रोजा भी खास है। आइए जानते हैं कि सातवां रोजा क्यों खास है और इस दिन अल्लाह की इबादत कैसे करें?

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7 वां रोजा क्यों खास है

Ramzan 2026, 7th Roza : आज 25 फरवरी 2026 को रमजान का सातवां रोजा रखा जा रहा है। रमजान 2026 की शुरुआत 19 फरवरी से हुई थी और अब रोजेदार एक हफ्ते का सफर पूरा कर चुके हैं। सातवां रोजा इसलिए खास माना जाता है क्योंकि यह इंसान को याद दिलाता है कि वह सिर्फ भूखा-प्यासा नहीं रह रहा, बल्कि धीरे-धीरे खुद को बदलने की प्रक्रिया में है।

रमजान का हर दिन अहम है, लेकिन सातवें रोजे तक पहुंचते-पहुंचते रोजेदार का शरीर और मन दोनों इस इबादत के अनुशासन में ढलने लगते हैं। यह वह समय होता है जब इंसान अपने अंदर झांककर देखता है कि उसने कितनी बुराइयों से दूरी बनाई और कितनी नेकियों को अपनाया।

सातवें रोजे की खासियत क्या है?(Satva Roza Kyo Khas Hai)

सातवां रोजा रमजान के पहले अशरे यानी रहमत के दौर में आता है। इस समय अल्लाह की रहमत की दुआ की जाती है। एक सप्ताह के रोजों के बाद रोजेदार संयम, सब्र और इबादत की आदत को मजबूत कर लेता है।

रोजा सिर्फ खाना-पीना छोड़ने का नाम नहीं है। अरबी में इसे ‘सौम’ कहा जाता है, जिसका मतलब खुद को रोकना है । यानी आंख, कान, जुबान और दिल सब पर नियंत्रण रखना है।

कुरआन में इंसान को अपने रब की ओर मेहनत करते हुए बढ़ने की बात कही गई है। कुरान से 30वें पारे की सूरह अलइन्किशाक की आयत 6 में जिक्र मिलता है कि, ‘या अय्युहल इन्सानु इन्नाका कादिहुन इला रब्बेला कदहन फमुलाकीह’. इसका मतलब है कि ऐ इंसान तू अपने परवरदिगार की ओर पहुंचने की खूब कोशिश करता है सो उससे जा मिलेगा। सातवां रोजा उसी कोशिश की याद दिलाता है कि रोजेदार अल्लाह की ओर बढ़ रहा है।

इस दिन कैसे करें इबादत? (Roze Mei Ibadat Kaise Kare)

सातवें रोजे में इबादत का तरीका अलग नहीं होता, लेकिन नीयत और ध्यान को और मजबूत करना चाहिए।

  • पांच वक्त की नमाज समय पर अदा करें।
  • कुरआन की तिलावत करें और उसके अर्थ को समझने की कोशिश करें।
  • जकात और सदका देने की नीयत बनाएं।
  • दिन भर गुस्से और बुरी बातों से बचें।
  • ज्यादा से ज्यादा दुआ करें, खासकर मगफिरत और रहमत की।
रमजान आत्म-सुधार का महीना है। इसलिए सातवें रोजे पर अपने पिछले छह दिनों का आत्म-मूल्यांकन करें और देखें कि कहां सुधार की जरूरत है।

25 फरवरी 2026 नमाज के अनुमानित समय (भारत के प्रमुख शहरों के आधार पर)

नमाज का समय हर शहर में अलग होता है, क्योंकि यह सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है।

  • फज्र: सुबह लगभग 5:32 – 5:35 बजे
  • जुहर: दोपहर लगभग 12:30 – 12:40 बजे
  • असर: शाम लगभग 4:30 – 4:45 बजे
  • मगरिब (इफ्तार): शाम लगभग 6:18 – 6:25 बजे
  • ईशा: रात लगभग 7:35 – 7:50 बजे
  • तरावीह: ईशा के बाद

दक्षिण और पूर्वी भारत में समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। सही समय के लिए स्थानीय मस्जिद या प्रमाणित नमाज टाइमटेबल देखें।

सातवें रोजे पर क्या रखें खास ध्यान?

  • सेहरी समय पर करें और फज्र से पहले खाना बंद कर दें।
  • इफ्तार सूर्यास्त के तुरंत बाद करें।
  • दिन भर संयम रखें — सिर्फ भोजन में नहीं, व्यवहार में भी।
  • जरूरतमंदों की मदद करें।

सातवां रोजा यह एहसास दिलाता है कि रमजान का एक हफ्ता गुजर चुका है। अब इबादत को और मजबूत करने का समय है। जो इंसान पूरे ध्यान और सच्चाई से रोजा रखता है, उसके लिए यह महीना आत्मिक बदलाव का बड़ा मौका बन सकता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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