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2 अक्टूबर को UPI से दुकानदार नहीं लेंगे पेमेंट! जानें क्या है बड़ी वजह?

2 अक्टूबर को देशभर के कई व्यापारी और दुकानदार ‘No UPI Day’ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस दिन वे अपने यूपीआई क्यूआर कोड और भुगतान मशीनों को ढककर नकद में लेनदेन करने की अपील करेंगे। जानिए इसकी वजह।

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2 अक्टूबर को UPI से दुकानदार नहीं लेंगे पेमेंट! जानें क्या है बड़ी वजह?

देशभर के व्यापारियों और दुकानदारों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने की अपील की है। संगठन ने दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों के व्यापारियों से कहा है कि वे इस दिन अपने यूपीआई क्यूआर कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध जताएं। इस दौरान ग्राहकों से नकद भुगतान लेने की अपील की गई है। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले यूपीआई के नए शुल्क से जुड़ा है।

₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर लगेगा MDR शुल्क

व्यापारियों के विरोध की मुख्य वजह मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शुल्क है। यह शुल्क डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी पर लगाया जाता है। नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से कुछ पात्र व्यापारी ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क देंगे। हालांकि, यह शुल्क ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाना है। छोटे कारोबारियों और कुछ विशेष श्रेणियों को नियमों के तहत छूट भी मिल सकती है।

व्यापारियों को क्यों है अतिरिक्त खर्च की चिंता?

CTI का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में दुकानदार और व्यापारी कम मुनाफे पर कारोबार करते हैं। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी कमाई पर असर पड़ सकता है। संगठन के मुताबिक, ₹3,000 के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹12 और ₹50,000 के भुगतान पर ₹200 शुल्क बनता है। बड़ी रकम के कुछ लेनदेन पर अधिकतम शुल्क की सीमा भी तय की गई है। व्यापारियों का मानना है कि इससे उनके कारोबार की लागत बढ़ सकती है।

UPI भुगतान में 50 प्रतिशत गिरावट की आशंका

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने आशंका जताई है कि अगर बड़े यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लागू हुआ तो डिजिटल भुगतान में कमी आ सकती है। संगठन का अनुमान है कि ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन में 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। हालांकि, यह संगठन का अनुमान है, कोई प्रमाणित आंकड़ा नहीं। व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए कुछ दुकानदार और ग्राहक नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं।

UPI के आंकड़े और व्यापारियों की मांग

CTI ने वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस दौरान यूपीआई के जरिए करीब 24,162 करोड़ लेनदेन हुए और इनका कुल मूल्य लगभग ₹314 लाख करोड़ रहा। संगठन के अनुसार, व्यापारियों को मिलने वाले भुगतानों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन का हिस्सा मूल्य के हिसाब से काफी बड़ा है। इसी वजह से व्यापारी इस शुल्क को लेकर चिंता जता रहे हैं।

सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

CTI ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर MDR शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि यूपीआई भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहे, ताकि छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने की अपील भी इसी विरोध का हिस्सा है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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