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Raksha Bandhan Sona Pujan Image Timing 2025: रक्षाबंधन के दिन होती है श्रवण कुमार की पूजा, जानें सोना पूजन का सही मुहूर्त और पूजा विधि

Raksha Bandhan Sona Pujan Image Timing 2025: श्रावण पूर्णिमा के दिन श्रवण कुमार की पूजा की जाती है। अब चूंकि श्रावण पूर्णिमा के दिन ही राखी होती है इसलिए इस दिन श्रवण कुमार की पूजा होती है, जिसे सोना पूजन भी कहा जाता है। यहां से आप सोना पूजन का शुभ समय, पूजा सामग्री और पूजा की विधि जान सकते हैं।

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रक्षा बंधन सोना पूजन टाइम 2025 (photo source: AI)

Raksha Bandhan Sona Pujan Image Timing 2025: रक्षाबंधन का दिन भाई-बहन के प्रेम का पवित्र पर्व, भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रक्षाबंधन के दिन सोना पूजन की भी एक खास परंपरा है। कहते हैं जब अयोध्या के राजा दशरथ ने गलती से श्रवण कुमार को तीर मार दिया था। तो इस घटना से राजा दशरथ को काफी दुख हुआ था। उन्होंने अपनी गलती की क्षमा मांगते हुए स्वयं ही इस घटना के बारे में श्रवण कुमार के माता–पिता को बताया। लेकिन बेटे की मौत का समाचार सुनकर दोनों ने प्राण त्याग दिये। तब राजा दशरथ ने प्रायश्चित करने के लिए श्रावण पूर्णिमा के दिन श्रवण पूजा का प्रचार किया। कहते हैं तभी से राखी के दिन श्रवण पूजा की परंपरा शुरू हो गई। बता दें कि सोना पूजन उसी जगह पर किया जाता है जहां नाग पंचमी की पूजा की गई होती है। कई जगह सोना पूजन के बाद ही बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं।

सोना पूजन का शूभ मुहूर्त-

रक्षाबंधन के दिन ही सोना पूजन होती है, इसलिए ये 9 अगस्त को ही है। बात करें पूजा के समय की तो सोना पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। ये पूजा हमेशा राखी बांधने से पहले और सुबह-सुबह करना ही सबसे शुभ माना जाता है।

सोना पूजन सामग्री-

  • पीला या लाल कपड़ा
  • लाल रंग (सोना का चित्र बनाने के लिए)
  • रोली
  • अक्षत
  • हल्दी
  • कुमकुम
  • पुष्प
  • दीपक
  • धूप
  • जल का कलश
  • मिठाई
  • राखी
  • लोटा
  • गेरू
  • मीठा

सोना पूजन की विधि-

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर पूजन स्थान की दीवार पर सोना का चित्र बनाएं। उस पर कुमकुम और हल्दी से तिलक करें और पुष्प अर्पित करें।

सोना पूजने के लिए हल्दी, रोली, अक्षत, जल से भरा लोटा, राखी या कलावा, गेरू और मीठे जवे की जरूरत होती है। साथ ही राखी भी चढ़ाई जाती है। अब ॐ श्रवणाय नमः मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। माँ लक्ष्मी और चंद्रदेव का ध्यान करें और धन-संपत्ति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें। अंत में आरती करें और सभी परिजनों को तिलक करके मिठाई बाँटें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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