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Putrada Ekadashi 2025 Parana Time: आज पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा, नोट कर लें व्रत खोलने का समय

Putrada Ekadashi 2025 Parana Time: पुत्रदा एकादशी व्रत का फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण भी विधि विधान किया जाए। इसलिए यहां हम आपको बताएंगे पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय और विधि।

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Putrada Ekadashi 2025 Parana Time

Putrada Ekadashi 2025 Parana Time (पुत्रदा एकादशी पारण समय 2025): इस साल पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 11 जनवरी 2025 को किया जाएगा। शास्त्रों अनुसार जिस तरह से एकादशी व्रत पूरे विधि विधान से रखा जाता है ठीक वैसे ही इस व्रत का पारण भी नियमपूर्वक करना चाहिए। व्रत पारण के दिन श्री हरि विष्णु की पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन जरूर कराना चाहिए। साथ ही उन्हें दान-दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए। चलिए आपको बताते हैं पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण समय और विधि।

पुत्रदा एकादशी पारण समय 2025 (Putrada Ekadashi 2025 Parana Time)

पुत्रदा एकादशी व्रत के पारण का समय 11 जनवरी 2025 की सुबह 07:15 से 08:21 तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 08:21 बजे तक रहेगा।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण विधि (Putrada Ekadashi Vrat Parana Vidhi)

पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण करने से पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं। फिर घर पर ब्राह्मणों को बुलाकर पूरी श्रद्धा से उन्हें भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद उन्हें दान-दक्षिणा के साथ विदा करें। इसके बाद ही व्रत में लगे भोग को ग्रहण कर अपना व्रत खोलें। अगर व्रत पारण के दिन ब्राह्मण न मिल पाएं को आप किसी जरूरतमंद को भोजन और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण कर सकते हैं।

(डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। timesnowhindi.com इसकी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की राय जरूर लें।)

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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