अध्यात्म

पितृपक्ष में क्या नहीं खरीदना चाहिए? जानें, किन चीजों को खरीदने से नाराज हो जाते हैं पितर, झेलना पड़ता है पितृदोष

Pitru Paksha 2025 Restrictions: आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि यानी आज 8 सितंबर से ही पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। इस दौरान कुछ ऐसी चीजें हैं जो आपकी नहीं खरीदनी चाहिए। पितृपक्ष के नियमों का पालन नहीं करने से पितृ दोष लग सकता है और जीवन की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

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पितृपक्ष में क्या नहीं खरीदना चाहिए (pic credit: iStock)

Pitru Paksha 2025 Restrictions: पितृपक्ष 15 दिनों का होता है, लेकिन इस साल क्षय तिथि होने की वजह से ये 14 दिनों तक ही रहने वाला है। साल 2025 में 8 सितंबर यानि आज ही के दिन से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है और 21 सितंबर अश्विन माह की अमावस्या तिथि पर ये समाप्त होगा। पितृपक्ष के दौरान कुछ ऐसे चीजें हैं, जो आपको नहीं खरीदनी चाहिए। अगर आप लापरवाही करते हैं और इन सामान को खरीदते हैं तो आपके परिवार पर पितृदोष भी लग सकता है।

पितृपक्ष में क्या नहीं खरीदना चाहिए

  • नए कपड़े
  • सोना, चांदी जैसे जेवर
  • गाड़ी
  • जमीन
  • जूते-चप्पल
  • शादी का सामान
  • लोहे का सामान

पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये काम-

इस समय में विवाह, सगाई समारोह आदि नहीं करना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है। साथ ही इन दिनों में नए घर की छत की ढलाई न करें। इससे पितृ नाराज हो सकते हैं और आपकी समस्या बढ़ सकती है और घर में पितृदोष लग सकता है।

पितृदोष क्या है?

पितृदोष का मतलब है पूर्वजों के अपूर्ण या अधूरे कार्यों, पितरों की आत्मा की असंतुष्टि, या पूर्वजों द्वारा किए गए पाप/कर्मों का प्रभाव वर्तमान पीढ़ी की कुंडली में होना। जब हमारे पूर्वजों की आत्माएं तृप्त नहीं होती, तो ये आत्माएं पृथ्वी लोक में रहने वाले अपने वंश के लोगों को कष्ट देती हैं, इसी को ज्योतिष शास्त्र में पितृदोष कहा गया है। अगर आप इसके लक्षण की बात करेंगे तो संतान प्राप्ति में बाधा, विवाह में समस्या, करियर में लगातार असफलता, पारिवारिक कलह, मानसिक अशांति और आर्थिक हानि है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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