Ganesh ji Mantra ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ: पूजा गणेश जी की हो या किसी भी भगवान की- गणपति का आवाहन हर पूजा में किया जाता है। इस लेख में ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ... गणेश मंत्र के पूरे लिरिक्स दिए गए हैं। साथ ही आप इसका शब्द से शब्द अर्थ जान सकते हैं। गणेश मंत्र के जाप करने की विधि भी यहां बताई गई है। इस मंत्र को नए कार्य के प्रारंभ में, गणेश पूजा आदि में जप सकते हैं।
Om Vakratunda Mahakaya Ganesh Mantra
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Om Vakratunda Mahakaya Ganesh Mantra Written
Om Vakratunda Mahākāya Sūryakoṭi Samaprabha।
Nirvighnaṁ Kuru Me Deva Sarva Kāryeṣu Sarvadā॥
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र का अर्थ हिंदी में
- ॐ – पवित्र ध्वनि या बीज मंत्र
- वक्रतुण्ड – जिनकी सूंड टेढ़ी है
- महाकाय – विशाल शरीर वाले
- सूर्यकोटि समप्रभ – करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले
- निर्विघ्नं कुरु मे देव – हे देव! मेरे सभी कार्यों को बिना विघ्न के पूर्ण कीजिए
- सर्वकार्येषु सर्वदा – मेरे सभी कार्यों में, हर समय
Om Vakratunda Mahakaya Mantra Ka Kya Arth Hai
हे टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले भगवान गणेश! कृपया मेरे सभी कार्यों को हमेशा बिना किसी विघ्न के संपन्न कीजिए।
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय गणेश मंत्र जाप की विधि
- सुबह स्नान के बाद साफ और शांत स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।
- भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र, जो भी आपने स्थापित किया हो, के सामने दीपक जलाएं।
- मन को शांत करके एकाग्रचित होकर जाप करें।
- रुद्राक्ष, तुलसी या स्फटिक की माला से जाप कर सकते हैं।
- आरंभिक स्तर पर आप इस मंत्र का जाप 11 या 21 बार से करें। इसके बाद अभ्यास से 108 बार तक लेकर जाएं।
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र के फायदे
ऐसा माना जाता है कि गणेश जी के इस मंत्र का जाप करने से कार्य में सफलता मिलती है, विघ्नों का नाश होता है, एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत में ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र का जाप कब करना चाहिए
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र का जाप आप रोज सुबह स्वच्छ हो कर सकते हैं। किसी कार्य की शुरूआत में भी इस मंत्र का जाप शुभदायी रहता है। गणेश चतुर्थी, बुधवार, संकष्टी चतुर्थी जैसे दिनों पर विशेष रूप से इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
