अध्यात्म

'ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने...', कहां से लिया गया है यह महामंत्र, जानिए क्या है इसका अर्थ

Lord Krishna Mantra : 'ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥' यह मंत्र आपने कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप इसका अर्थ और जाप का तरीका जानते हैं? अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

Image

क्या है इस महामंत्र का अर्थ

Lord Krishna Mantra : आजकल 'ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥' मंत्र काफी चर्चा में है, जिसे संत प्रेमानंद महाराज Premanand Maharaj भी अपने प्रवचनों में बेहद प्रभावशाली बताते हैं। यह मंत्र सिर्फ एक साधारण श्लोक नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण की प्रार्थना है, जिसे जपने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। यह क्लेशनाशक मंत्र है।

क्या है पूरा मंत्र?

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥

कहां से लिया गया है यह मंत्र?

यह श्लोक प्राचीन ग्रंथ श्रीमद् भागवत पुराण के दशम स्कंध (कैंटो 10), अध्याय 73, श्लोक 16 में मिलता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण को परमात्मा और संपूर्ण जगत के पालनहार के रूप में नमन किया गया है। वैष्णव परंपरा में इस मंत्र को विशेष स्थान दिया गया है और इसे शरणागति का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है।

क्या है मंत्र का अर्थ?

इस मंत्र का अर्थ गहरा और भावपूर्ण है। 'कृष्णाय' यानी भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार, 'वासुदेवाय' यानी वसुदेव के पुत्र और सर्वव्यापी ईश्वर को प्रणाम, 'हरये' यानी जो सभी दुखों को हर लेते हैं, 'परमात्मने' यानी जो हर जीव के भीतर मौजूद हैं। 'प्रणतः क्लेशनाशाय' का अर्थ है जो शरण में आए लोगों के कष्ट दूर करते हैं और 'गोविंदाय नमो नमः' के माध्यम से भगवान गोविंद को बार-बार नमन किया जाता है।

सरल अर्थ- 'वासुदेव के पुत्र, परमात्मा और दुखों को हरने वाले भगवान श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूं। हे गोविंद, मेरे क्लेशों का नाश करें, मैं आपको बार-बार नमन करता हूं।'

क्यों माना जाता है यह महामंत्र?

यह मंत्र इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि इसमें भगवान श्रीकृष्ण के कई स्वरूपों का एक साथ स्मरण होता है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, इस मंत्र का जाप मन को शांत करता है, नकारात्मकता को दूर करता है और व्यक्ति को अंदर से मजबूत बनाता है। इसके साथ ही बड़ी-बड़ी विपत्ति इसके जाप से दूर हो जाती है। यह मंत्र व्यक्ति को भगवान से जोड़कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

कैसे करें इस मंत्र का जाप?

इस मंत्र का जाप सुबह ब्रह्म मुहूर्त या शाम के समय करना शुभ माना जाता है। शांत स्थान पर बैठकर, भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए इसका जाप करना चाहिए। आप माला के साथ 108 बार जप कर सकते हैं या अपनी सुविधा के अनुसार भी कर सकते हैं। नियमित और श्रद्धा के साथ किया गया जाप अधिक प्रभावी माना जाता है।

किसे और कब जपना चाहिए यह मंत्र?

यह मंत्र हर व्यक्ति के लिए लाभकारी है, लेकिन खासतौर पर उन लोगों के लिए जो मानसिक तनाव, डर या जीवन की समस्याओं से परेशान हैं। किसी नए काम की शुरुआत, परीक्षा या कठिन समय में इसका जाप करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

क्या हैं इसके लाभ?

इस मंत्र के नियमित जाप से मानसिक शांति मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह कष्टों को कम करता है और जीवन में सुख-शांति लाता है। इसके साथ ही विपत्तियों और संकट का नाश होता है।

जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

End of Article