Blue Ganesh Idol Puja Niyam: गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय कोई उनकी सूंड देखता है तो कोई बैठने की मुद्रा। रंग को लेकर भी कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। खासकर नीले रंग के गणपति को देखकर अक्सर लोग पूछते हैं- क्या इन्हें घर के मंदिर में रखना चाहिए? कहीं ऐसी मूर्ति अशुभ तो नहीं?
वैसे नील वर्ण में भगवान गणेश की मूर्ति कम ही नजर आती है। जबकि भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को भी नीले वर्ण में दिखाया जाता है। दरअसल, नीले रंग के गणेश जी का एक विशेष स्वरूप माना जाता है।
नीले गणपति की पूजा क्यों नहीं की जाती
गणपति के कुछ नीले या गहरे वर्ण वाले रूप तंत्र साधना से जुड़े माने जाते हैं। इनकी पूजा सामान्य घरेलू पूजा से अलग होती है। विशेष मंत्र और नियमों के साथ इनकी साधना की जाती है। कई परंपराओं में इसके लिए गुरु का मार्गदर्शन भी जरूरी बताया गया है।
यही वजह है कि गृहस्थों को पूजा घर में गणेश जी का शांत और सौम्य स्वरूप रखने की सलाह दी जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि नीले गणपति बुरे या अशुभ हैं। बस हर स्वरूप की पूजा का तरीका एक जैसा नहीं होता।
नीले रंग के गणपति कौन से होते हैं
नहीं, नीले गणपति को अशुभ कहना सही नहीं होगा। गणेश जी के अनेक स्वरूपों में उच्छिष्ट गणपति का वर्ण कुछ धार्मिक वर्णनों में नीला माना गया है। यह उनका विशेष तांत्रिक स्वरूप है। इसकी साधना सामान्य गृहस्थ पूजा की तरह नहीं की जाती।
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि बाजार में मिलने वाली हर नीली गणेश मूर्ति उच्छिष्ट गणपति नहीं होती। कई मूर्तियों को केवल सुंदर दिखाने या आधुनिक डिजाइन के कारण नीला रंग दिया जाता है। इसलिए केवल रंग देखकर डरने या किसी मूर्ति को अशुभ मान लेने की जरूरत नहीं है।
घर के मंदिर में किस रंग के गणेश जी रखें
घर में सामान्य पूजा के लिए सफेद, पीले, सिंदूरी या मिट्टी के प्राकृतिक रंग वाले गणपति अधिक रखे जाते हैं। सफेद गणपति शांति और सकारात्मकता से जोड़े जाते हैं। जबकि सिंदूरी गणपति को मंगल और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। समृद्धि की कामना से घर में पीले या सुनहरे रंग के गणपति रखे जाते हैं।
घर के मंदिर के लिए बैठे हुए और प्रसन्न मुद्रा वाले गणपति शुभ माने जाते हैं। बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा अपेक्षाकृत सरल मानी जाती है।
घर में पहले से नीले गणेश जी हों तो क्या करें
अगर आपके घर में नीले रंग की सामान्य गणेश प्रतिमा है और आप लंबे समय से श्रद्धा के साथ पूजा कर रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। पहले यह समझें कि मूर्ति सामान्य सजावटी स्वरूप में है या किसी विशेष तांत्रिक रूप में। संदेह होने पर किसी जानकार से सलाह ली जा सकती है। प्रतिमा को कभी भी अपमानजनक तरीके से न हटाएं।
