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Pithori Amavasya Vrat Katha: आज है पिठोरी अमावस्या, यहां पढ़ें अमावस्या व्रत कथा, पिठोरी अमावस्या व्रत की कहानी क्या है इन हिंदी

Pithori Amavasya Vrat Katha, पिठोरी अमावस्या व्रत कथा, कहानी इन हिंदी: आज पिठोरी अमावस्या का व्रत रखा जा रहा है। भाद्रपद अमावस्या के व्रत की कथा यहां पढ़ें। पिठोरी अमावस्या व्रत कथा, कहानी इन हिंदी।

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पिठोरी अमावस्या व्रत कथा इन हिंदी

Pithori Amavasya Vrat Katha, पिठोरी अमावस्या व्रत कथा, कहानी इन हिंदी : हिंदू पंचांग के अनुसार पिठोरी अमावस्या का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। पिठोरी अमावस्या पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान व पितरों का स्मरण करने का महत्व है। अपनी श्रद्धा के अनुसार तर्पण, दीपदान और दान कर सकते हैं। इस दिन माताएं संतान की सुख-समृद्धि के लिए पिठोरी माता और मातृ शक्तियों की पूजा करती हैं। पूजा पाठ के साथ पिठोरी अमावस्या की कथा का पाठ भी किया जाता है। यहां पढ़ें पिठोरी अमावस्याव्रत कथा, भाद्रपद अमावस्या, पोलाला अमावस्या कहानी इन हिंदी।

Pithori Amavasya Vrat Katha in Hindi, पिठोरी अमावस्या व्रत कथा, कहानी इन हिंदी

कहा जाता है कि पुराने समय में एक परिवार में सात भाई रहते थे। सभी भाइयों की शादी हो चुकी थी और उनके अपने-अपने बच्चे भी थे। परिवार में सुख-शांति थी, लेकिन बच्चों की सलामती को लेकर घर की महिलाओं के मन में हमेशा चिंता रहती थी। पिठोरी अमावस्या के दिन सातों भाइयों की पत्नियों ने अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से व्रत रखने का फैसला किया। सबसे बड़े भाई की पत्नी ने भी पूरे श्रद्धा भाव से व्रत किया। लेकिन व्रत के बाद उसके एक बेटे की मृत्यु हो गई। वह मां इस घटना से पूरी तरह टूट गई।

अगले वर्ष उसने फिर संतान की कुशलता के लिए व्रत रखा, लेकिन इस बार भी उसके एक बेटे की मृत्यु हो गई। इसी तरह हर साल व्रत रखने के बाद उसके एक-एक बेटे की मृत्यु होती रही। सातवें वर्ष तक वह अपने सातों बेटों को खो चुकी थी। अपने बच्चों की मौत का दुख वह मां सह नहीं पा रही थी। इस बार उसने अपने मृत बेटों के शवों को छिपा दिया। उसी समय गांव की देवी मां पोलेरम्मा वहां लोगों की रक्षा के लिए भ्रमण कर रही थीं। उनकी नजर उस दुखी महिला पर पड़ी। देवी ने उसकी परेशानी जानने के लिए उससे बात की।

महिला ने रोते हुए अपनी पूरी कहानी देवी को सुनाई। उसकी पीड़ा देखकर मां पोलेरम्मा का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने उसे एक उपाय बताया। देवी ने कहा कि जिन-जिन जगहों पर उसके बेटों का अंतिम संस्कार किया गया था, वहां जाकर हल्दी छिड़के। मां ने देवी के बताए अनुसार हर उस स्थान पर हल्दी चढ़ाई और फिर अपने घर लौट आई। घर पहुंचकर उसने जो देखा, उससे उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उसके सातों बेटे जीवित थे।

मां के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उसने देवी को धन्यवाद दिया और इस घटना को गांव की दूसरी महिलाओं को बताया। इसके बाद गांव में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से पिठोरी अमावस्या का व्रत रखने लगीं। इसी मान्यता के कारण पिठोरी अमावस्या को संतान की मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन आटे से 64 देवियों की आकृतियां बनाकर पूजा करने की परंपरा भी बताई जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं श्रद्धा से देवी का स्मरण करती हैं और अपने बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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