Navratri Ki Navami Par Havan Kaise Kare (घर पर हवन करने की विधि): चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि 27 मार्च 2026 को है। इस दिन हवन करना नवरात्रि साधना का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस दिन सुबह 10 बजकर 8 मिनट तक नवमी तिथि और अग्निवास पृथ्वी पर रहेगा, इसलिए इसी समय के भीतर हवन करना सबसे शुभ रहेगा।
अगर आप घर पर बिना पंडित के हवन करना चाहते हैं, तो नीचे दी गई संकल्प विधि, हवन सामग्री और पूरे मंत्रों के साथ आप सही तरीके से हवन कर सकते हैं। नवमी तिथि पर माता दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि हवन के बिना पूरे 9 दिन की पूजा व व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। आइए जानते हैं कि इस दिन किस प्रकार से हवन करें।
नवरात्रि की नवमी पर हवन का समय (Navratri Navami Havan Timing)
नवमी के दिन हवन का सबसे शुभ समय सुबह से लेकर 10:08 बजे तक रहेगा। इसी समय अग्नि का निवास पृथ्वी पर होता है, जिससे हवन का फल अधिक प्रभावी माना जाता है।
नवमी हवन की सामग्री (Navami Havan Ki Samagri)
हवन के लिए हवन कुंड, आम की लकड़ी, उपले, हवन सामग्री (जौ, तिल, चावल, नवधान्य, गुग्गुल आदि मिश्रण), शुद्ध देसी घी, कपूर, रुई, दीपक, धूप-अगरबत्ती, जल से भरा कलश, रोली, अक्षत, फूल, माला, नारियल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, कलावा, फल और प्रसाद रखें। अंत में पूर्णाहुति के लिए एक सूखा नारियल अलग से रखें जिसमें घी और सामग्री भरी जा सके।
संकल्प की विधि
हवन शुरू करने से पहले दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लें और यह संकल्प मंत्र बोलें।
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
ममोपात्त समस्त दुरितक्षयद्वारा श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं,
चैत्र नवरात्रि नवमी तिथौ,
मम (अपना नाम), (अपना गोत्र),
सकल मनोकामना सिद्ध्यर्थं हवनं करिष्ये।
इसके बाद हाथ का जल जमीन पर छोड़ दें।
हवन की शुरुआत (Havan Start Mantra)
सबसे पहले अग्नि प्रज्वलित करें और इन मंत्रों से 5 बार घी की आहुति दें—
ॐ प्रजापतये स्वाहा।
ॐ इन्द्राय स्वाहा।
ॐ अग्नये स्वाहा।
ॐ सोमाय स्वाहा।
ॐ भूः स्वाहा।
नवग्रह मंत्र (Navgrah Mantra)
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा।
ऊँ चंद्रमसे स्वाहा।
ऊँ भौमाय नमः स्वाहा।
ऊँ बुधाय नमः स्वाहा।
ऊँ गुरवे नमः स्वाहा।
ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा।
ऊँ शनये नमः स्वाहा।
ऊँ राहवे नमः स्वाहा।
ऊँ केतवे नमः स्वाहा।
गायत्री मंत्र (21 बार आहुति दें)
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् स्वाहा।
देवी-देवता हवन मंत्र
ॐ गणेशाय नमः स्वाहा।
ॐ गौरियाय नमः स्वाहा।
ॐ नवग्रहाय नमः स्वाहा।
ॐ दुर्गाय नमः स्वाहा।
ॐ महाकालिकाय नमः स्वाहा।
ॐ हनुमते नमः स्वाहा।
ॐ भैरवाय नमः स्वाहा।
ॐ कुल देवताय नमः स्वाहा।
ॐ स्थान देवताय नमः स्वाहा।
ॐ ब्रह्माय नमः स्वाहा।
ॐ विष्णुवे नमः स्वाहा।
ॐ शिवाय नमः स्वाहा।
नवदुर्गा मंत्र (Navdurga Mantra)
ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा।
ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा।
ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा।
ॐ चंद्रघंटा देवी नमः स्वाहा।
ॐ कुष्मांडा देवी नमः स्वाहा।
ॐ स्कन्द देवी नमः स्वाहा।
ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा।
ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा।
ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा।
ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा।
विशेष मंत्र और स्तुति
ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमस्तुते स्वाहा।
ॐ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानुः शशिः भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शांति कराः भवन्तु स्वाहा।
ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः स्वाहा।
महामृत्युंजय मंत्र (11 बार आहुति दें)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वाहा।
नारायणी मंत्र
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे। सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते स्वाहा।
बीज मंत्र (108 बार)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै स्वाहा।
दुर्गा स्तुति (श्लोक से आहुति)
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा।
स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः स्वाहा।
या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितैः अस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः स्वाहा।
पूर्णाहुति मंत्र (Purnahuti Mantra)
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते स्वाहा।
इसके साथ नारियल में घी, पान, सुपारी, लौंग आदि भरकर हवन कुंड में अर्पित करें। अंत में आरती करें और माता से क्षमा याचना करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
