अध्यात्म

आज के नवरात्र की आरती, नौवें नवरात्र की आरती, नवमी पर कौन सी मां की आरती करें - देखें नवमी की आरती के लिरिक्स लिखित में

Navami Aarti Lyrics (नवमी की आरती के लिरिक्स): चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजन का विधान है। पूजन के उपरांत माता की आरती का पाठ करना चाहिए। यदि आप नौवीं की आरती पढ़ना चाहते हैं, तो यहां ये नोट करे और पढ़ें नवमी की आरती के लिरिक्स।

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आज की आरती, नवमी की आरती

Navami Aarti Lyrics (नवमी की आरती के लिरिक्स): चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन को महानवमी कहा जाता है। यह दिन देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। यह दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक सिद्धि की साधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के साथ उनकी आरती करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मान्यता है कि नवमी के दिन सच्चे मन से की गई आराधना जीवन के सभी कष्टों को दूर कर सफलता, सुख-समृद्धि और सिद्धियों की प्राप्ति कराती है। नवमी के दिन पूजा के साथ-साथ आरती करने का विशेष महत्व होता है। आरती के माध्यम से भक्त देवी मां के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं। आगे पढ़ें नौवें नवरात्र पर मां सिद्धिदात्री की संपूर्ण आरती के लिरिक्स।

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता

तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!

कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम

जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,

तेरी पूजा में तो न कोई विधि है

तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!

रविवार को तेरा सुमरिन करे जो

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,

तुम सब काज उसके कराती हो पूरे

कभी काम उसके रहे न अधूरे!!

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया

रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,

सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली

जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता

वंदना है सवाली तू जिसकी दाता।

दुर्गा माता की आरती के लिरिक्स

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।

रक्त पुष्प गलमाला, कंठन पर साजे॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

शुंभ-निशुंभ विदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोकन नैना, निशदिन मदमाती॥

चंड-मुंड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरव।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुख हर्ता, सुख संपत्ति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

आज माता रानी के पूजन का अंतिम दिन है, तो आप माता रानी की आरती के साथ अपना पूजन को विराम दे सकते हैं।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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