अध्यात्म

Naramada jayanti: नर्मदा जयंती आज, कब करें पूजन, क्यों कहते हैं इसको कुंवारी नदी

Narmada Jayanti Pooja Vidhi Shubh Muhurta: नर्मदा जयंती आज मनाई जा रही है। यह दिन अध्यात्मिक दृष्टि से हमारे जीवन में बहुत खास महत्व रखता है। यह सिर्फ तिथि नहीं, श्रद्धा का संगम है। जानिए कब करें मां नर्मदा का पूजन, क्यों नर्मदा को कुंवारी नदी कहा जाता है और इस दिन का आध्यात्मिक महत्व क्या है।

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नर्मदा जयंती 2026, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त (PC- Istock)

Narmada Jayanti Pooja Vidhi Shubh Muhurta: आज का दिन कुछ अलग है। आज ऐसा लगता है जैसे आस्था खुद चलकर हमारे पास आ गई हो। नर्मदा जयंती का दिन सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि भावनाओं, विश्वास और सदियों पुरानी श्रद्धा का संगम है। बचपन से सुनते आए हैं कि नर्मदा मां के दर्शन मात्र से मन हल्का हो जाता है। आज वही दिन है, जब मां नर्मदा के प्रकट होने की स्मृति में लोग उन्हें याद करते हैं, पूजते हैं और मन ही मन उनसे अपने दुख-दर्द कह देते हैं। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि आस्था शोर नहीं करती, बस चुपचाप दिल को छू जाती है।

नर्मदा जयंती आज क्यों है खास

नर्मदा जयंती हर साल माघ शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन मां नर्मदा धरती पर प्रकट हुई थीं। आज के दिन लोग नदी को सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि मां का रूप मानकर पूजते हैं। कहते हैं, नर्मदा का नाम लेते ही मन में एक अजीब सी शांति उतर आती है। शायद इसलिए, क्योंकि यह नदी सिर्फ जमीन नहीं, दिलों को भी सींचती है।

कब करें नर्मदा पूजन

नर्मदा जयंती के दिन सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है। विशेष रूप से शुभ माना जाता है ब्रह्म मुहूर्त (लगभग सुबह 5:26 से 6:19 तक), जब स्नान करने के बाद नदी की प्रार्थना और पूजा की जा सकती है। उसके बाद दोपहर और शाम के समय भी पूजा-अर्चना के शुभ मुहूर्त होते हैं।

सूरज निकलने के बाद स्नान कर पूजा की शुरुआत की जाती है। अगर नदी तट पर जाकर पूजा कर पाएं तो बहुत अच्छा, लेकिन घर पर भी सच्चे मन से मां नर्मदा को याद करना ही पर्याप्त माना जाता है। दीपक जलाकर, फूल अर्पित कर और थोड़ी देर आंख बंद करके उनका ध्यान करने से मन अपने आप शांत हो जाता है। इस दिन पवित्र नदी के लिए गीत गाए जाते हैं और भजन-कीर्तन भी होता है

क्यों कहते हैं नर्मदा को कुंवारी नदी

अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि नर्मदा को “कुंवारी नदी” क्यों कहा जाता है। मान्यता है कि मां नर्मदा ने कभी किसी से विवाह नहीं किया और आज भी उसी पवित्र, निष्कलंक रूप में बह रही हैं। यही वजह है कि उन्हें कुंवारी कहा जाता है। कहा जाता है कि नर्मदा अपने भक्तों के पापों को बिना कुछ मांगे हर लेती हैं, जैसे मां अपने बच्चे की गलती माफ कर देती है।

नर्मदा और जीवन का रिश्ता

नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि जीवन का आईना हैं। उनकी धारा हमें सिखाती है कि आगे बढ़ते रहना ही जीवन है। न रुकना, न थकना। जैसे नर्मदा चट्टानों से टकराकर भी शांत भाव से आगे बढ़ जाती हैं, वैसे ही इंसान को भी मुश्किलों के बीच संयम रखना चाहिए।

आज के दिन क्या संदेश देती है नर्मदा जयंती

नर्मदा जयंती हमें याद दिलाती है कि आस्था दिखावे की नहीं होती। सच्ची भक्ति वही है, जो दिल से निकले। आज के दिन मां नर्मदा से बस इतना ही मांगना काफी है कि जीवन में भी उनकी तरह शुद्धता, धैर्य और शांति बनी रहे।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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