Nag Panchami vrat Paran time 2025 (नाग पंचमी का व्रत का पारण समय): नाग पंचमी का व्रत सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन भक्ति भाव से नाग देवों का पूजन होता है और इसी के साथ ही व्रत भी रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने के साथ ही नाग पंचमी व्रत का पारण भी विधिवत किया जाता है। जो कुछ जगहों पर अगले दिन सूर्योदय के समय होता है और कई जगह शाम की पूजा के बाद इसका पारण कर दिया जाता है।
नाग पंचमी व्रत का पारण समय
नाग पंचमी के व्रत का पारण नाग पंचमी के दिन ही दोपहर या शाम को पूजा के बाद कर दिया जाता है। जो श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, वो इस पूजा के साथ ही व्रत का पारण कर देते हैं। जो लोग नाग पंचमी का फलाहारी व्रत रखते हैं, वे नाग पंचमी के अगले दिन सूर्योदय के बाद विधिवत व्रत का पारण करते हैं।
नाग पंचमी व्रत की पारण विधि
नाग देवता के दिन शाम को नाग देवता की दूध, दूब , चंदन, फूल, भोग आदि के साथ विधिवत पूजा करें। आरती करने के बाद नाग देवता का आशीर्वाद लें और व्रत खोलते हुए में किसी त्रुटि की माफी मांग लें। परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। अगर किसी इच्छा या मनौती के लिए व्रत रखा है तो उसके पूरे होने की भी प्रार्थना करें।
फिर प्रसाद ग्रहण करें। सात्विक खाना खाएं। कई जगहों पर पारण के समय तिल और चावल का भोजन किया जाता है। इसके पीछे सांपों की रक्षा की भावना की वजह मानी जाती है। नाग पंचमी के व्रत पारण में दूध, अनाज, वस्त्र, तांबा या नाग देवता की मूर्ति को किसी ब्राह्मण या गरीब को दान देना चाहिए।
अगर आप अगले दिन पारण करते हैं तो भी इसकी विधि यही रहेगी। इस दिन सात्विक भोजन करें और दान दें।
डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
