Nag Panchami 2023 Kab hai (नाग पंचमी डेट): 4 जुलाई से शुरू हुए सावन के महीने में शिव भक्ति करने का बहुत ही गहरा महत्व होता है। भगवान शंकर की स्तुति के साथ साथ सावन में हरियाली तीज (Hariyali Teej), रक्षाबंधन (Raksha Bandhan), नाग पंचमी (Nag Panchami) आदि जैसे तीज त्योहार भी बहुत जोरो शोरों से मनाए जाते हैं। भगवान शिव को प्रिय नाग देव की पूजन तो सावन में विशेष लाभ वाली होती है। हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में बड़े ही जोरो शोरों से मनाया जाता है। हिन्दु पंचांग अनुसार यहां देखें सावन 2023 में नाग पंचमी कब पड़ रही है और इस त्योहार को मनाने के पीछे महत्व क्या है?
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Sawan 2023 Nag Panchami date, सावन में नाग पंचमी कब मनाई जाएगी
4 जुलाई से शुरु होकर 31 अगस्त को खत्म होने वाले दो माह के इस सावन में पूजन अर्चन करने से जातकों को बहुत से दुर्लभ लाभों की प्राप्ति होने का प्रावधान है। सावन में शिव जी के साथ उनके प्रिय नाग देव की पूजा भी बहुत महत्व रखती है। इस साल के सावन में नाग पंचमी का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार 21 अगस्त सोमवार के दिन मनाया जाएगा। शिव जी के वार सोमवार के दिन इस त्योहार के पड़ने का बहुत ही विशेष अर्थ है। वैसे तो हर महीने की पंचमी तिथि पर नाग देव की पूजा होती है, लेकिन श्रावण मास की पंचमी पर खास नाग पंचमी का त्योहार होता है। और इस दिन नाग देव की पूजा करने से अवश्य ही जातकों को विशेष लाभ मिलते हैं।
नाग पंचमी क्यों मनाते हैं? Why is Nag Panchami celebrated
21 अगस्त 2023 सोमवार के दिन पड़ रही नाग पंचमी को मनाने का सनातन धर्म में बहुत गहरा महत्व है। दरअसल पौराणिक कथा के अनुसार अर्जुन के पोते जनमेजय ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए सर्पसत्र नाम के यज्ञ का आयोजन किया था और तभी सारे नागों की रक्षा के लिए आस्तिक मुनि ऋषि ने श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन इस यज्ञ को रोक दिया था। और तभी तक्षक नाग के बच जाने नागों का वंश बच गया। आग के ताप से बचाने के लिए ऋषि ने तब कच्चा दूध डाला था और इसलिए नागों की पूजा में कच्चा दूध चढ़ाते हैं।
नाग पंचमी शुभ मुहूर्त, Nag panchami shubh muhurat
साल 2023 की नागपंचमी की शुभ तिथि 21 अगस्त पंचमी की रात 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानि की 22 अगस्त की रात 2 बजे समाप्त होगी। मुहूर्त के अनुसार नाग देव की पूजा करने से जातकों के जीवन में खुशियों का संचार होता है। वहीं इससे काल सर्प दोष, पितृ दोष दूर होता है और इसी त्योहार को मनाने से जातकों के जीवन में तरक्की भी होती है।
