अध्यात्म

Mauni Amavasya Par Kya Kare: मौनी अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं? जानिए यहां

Mauni Amavasya Par Kya Kare: माघ यानी मौनी अमावस्या का दिन स्नान, जप और तप के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के जल में देवताओं का वास होता है। इसलिए इस दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करना बेहद शुभ माना गया है। चलिए आपको बताते हैं मौनी अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए।

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Mauni Amavasya Ke Din Kya Karna Chahiye

Mauni Amavasya Par Kya Kare: हिंदू पंचांग अनुसार माघ कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। जो इस बार 29 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु मौन रहकर पवित्र नदी, कुंड या जलाशय में स्नान करते हैं जो बेहद ही फलदाई माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी इस दिन मौन रहकर पवित्र स्नान करने के बाद दान पुण्य करता है उसे मुनि पद की प्राप्ति होती है। चलिए आपको बताते हैं मौनी अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

मौनी अमावस्या पर क्या करना चाहिए (Mauni Amavasya Par Kya Karna Chahiye)

  • मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान जरूर करना चाहिए।
  • इस दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करने का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है।
  • स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य जरूर अर्पित करना चाहिए।
  • जहां तक संभव हो इस दिन मौन व्रत रहना चाहिए।
  • इसके अलावा गरीब, भूखे और ज़रूरतमंद लोगों को भोजन कराकर दान देना चाहिए।
  • ये दिन पितरों के तर्पण के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु और शिव शंकर जी की पूजा का विशेष महत्व होता है।

मौनी अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए (Mauni Amavasya Par Kya Nahi Karna Chahiye)

मौनी अमावस्या पर किसी को भी अपशब्द न कहें। इस दिन श्मशान आदि स्थानों पर जाने से बचें। गरीब लोगों का अपमान न करें। मांस-मदिरा जैसी तामसिक चीज़ों का भूलकर भी सेवन न करें।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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