Masik Shivratri 2026: रात 10 बजे से होगी साल 2026 की पहली मासिक शिवरात्रि की शुरुआत, जानें पूजा मुहूर्त और महत्व
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 16, 2026, 07:03 PM IST
Masik Shivratri 2026 (मासिक शिवरात्रि 2026): हिंदू धर्म में किसी भी माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि के मेल पर मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। साल 2026 की पहली मासिक शिवरात्रि 16 जनवरी को रात 10 बजे के बाद शुरू हो रही है। आइए जानते हैं कि इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
साल की पहली मासिक शिवरात्रि की पूजन विधि
Masik Shivratri 2026 (मासिक शिवरात्रि 2026): हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। हर माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि के मेल पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से की गई पूजा से शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं।
माघ माह की मासिक शिवरात्रि 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की मासिक शिवरात्रि 16 जनवरी 2026 को मनाई जा रही है। यह साल 2026 पहली मासिक शिवरात्रि भी है, जिसे धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी 2026 को रात 10 बजकर 21 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी और चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी। त्रयोदशी और चतुर्दशी के संयोग से ही मासिक शिवरात्रि का पर्व आरंभ होता है। चतुर्दशी तिथि 17 जनवरी 2026 की रात 12 बजकर 03 मिनट तक रहेगी। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है।
मासिक शिवरात्रि का पूजा मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि में निशिता काल को पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस समय शिव पूजा करने से विशेष पुण्य फल मिलता है। निशिता काल पूजा समय 16 जनवरी की रात 12 बजकर 04 मिनट से रात 12 बजकर 58 मिनट तक है। वहीं, भद्रावास रात 10 बजकर 21 मिनट से (भद्रा पाताल लोक में रहेगी) रहेगा। इस दौरान शिववास श्मशान में रहेगा। भद्रा के पाताल में रहने के कारण इस दिन शिव पूजा पर कोई बाधा नहीं मानी जाती है।
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा विधि का पालन करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। निशिता मुहूर्त से पहले स्नान कर स्वच्छ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को शुद्ध कर शिवलिंग स्थापित करें। पंचोपचार विधि से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में शिव आरती करें और सुख, शांति, सौभाग्य और समृद्धि की कामना करें।
मासिक शिवरात्रि व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, करियर और स्वास्थ्य से जुड़ी बाधाएं कम होती हैं और मन को शांति मिलती है। यह दिन शिव भक्ति और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना जाता है।