अध्यात्म

चूड़ा का क्या महत्व है, क्या है संक्रांति से इसका कनेक्शन, बिहार में चूड़ा कैसे खाया जाता है

  • Authored by: Srishti
  • Updated Jan 15, 2026, 01:56 PM IST

Bihar Ka Chura Dahi: मकर संक्रांति के दिन चूड़ा- दही खूब खाया जाता है। लेकिन इसका कारण और महत्व क्या है, इसकी जानकारी कम ही लोगों को होगी। यहां हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही बताएंगे चूड़ा और संक्रांति का कनेक्शन। इतना ही नही, यहां से आप जान सकते हैं कि बिहार में चूड़ा कैसे खाया जाता है।

मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही खाने का महत्व (pc: canva)

मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही खाने का महत्व (pc: canva)

Bihar Ka Chura Dahi: मकर संक्रांति के अवसर पर घर में तरह-तरह के पकवान बनाए और खाए जाते हैं, लेकिन इसमें भी खिचड़ी, चावल, गुड़ और तिल सबसे खास है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा सबसे ज्यादा खाया जाता है। दही- चूड़ा न केवल स्वाद में बेस्ट होता है, बल्कि हेल्थ के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। असल में इसे बनाना भी आसान है। दही-चूड़ा में आप अपनी पसंद के अनुसार चीनी या गुड़ मिला सकते हैं। लेकिन अब सवाल ये है कि चूड़ा-दही और मकर संक्रांति का क्या संबंध है और इसे ही क्यों खाया है। इस तरह के सभी सवालों के जवाब यहां मौजूद हैं।

चूड़ा को किस- किस नाम से जाना जाता है?

बिहार और उत्तर प्रदेश में जो चूड़ा है वही महाराष्ट्र में पोहा कहा जाता है। पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में इसे ही चिउड़ा के नाम से जाना जाता है। गुजरात में यही चिवड़ा हैं और तमिलनाडु में अवल कहलाता है। नेपाल में तो इसे चिउरा बोलते हैं।

भारत में चूड़ा के अलग-अलग नाम (pc: pinterest)

भारत में चूड़ा के अलग-अलग नाम (pc: pinterest)

चूड़ा और मकर संक्रांति का संबंध-

मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है और सूर्य ही धान की खेती का आधार हैं। चूड़ा धान से बनता है, इसलिए इसे सूर्य देव को अर्पित अन्न माना गया है। इस दिन नया धान घर आता है, जिसे चूड़ा बनाकर खाना और दान करना समृद्धि का प्रतीक है। ठंड के मौसम में चूड़ा हल्का होता है और जल्दी भी पच जाता है। वहीं, दही ठंडक देता है और गुड़ शरीर को ऊर्जा देता है। इसीलिए दही- चूड़ा संक्रांति के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। बिहार, पूर्वी यूपी, झारखंड और नेपाल जैसे क्षेत्रों में तो मकर संक्रांति को चूड़ा- दही पर्व भी कहा जाता है और बिना चूड़ा खाए संक्रांति यहां अधूरी मानी जाती है।

चूड़ा-दही खाने का महत्व (pc: pinterest)

चूड़ा-दही खाने का महत्व (pc: pinterest)

मकर संक्रांति के दिन दही चूड़ा खाने का महत्व-

मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक देसी एनर्जी ड्रिंक है। ठंड के मौसम में जब शरीर सुस्त रहता है, तब हल्का- फुल्का चूड़ा, ठंडक देता दही और ताकत देने वाला गुड़ मिलकर ऐसा संतुलन बनाते हैं कि पेट भी खुश, दिमाग भी खुश और दिल तो और ज्यादा खुश हो जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चूड़ा धान से बना होने के कारण सूर्य देव को प्रिय है और दही-गुड़ के साथ खाने से अन्नदान का पूरा पुण्य मिल जाता है। ऊपर से यह गरीब हो या अमीर, ये सबके लिए एक सा भोजन है, इसलिए इसमें बराबरी का भाव भी आता है। तभी तो मकर संक्रांति पर लोग कहते हैं- खिचड़ी बाद में, पहले दही- चूड़ा।

बिहार में चूड़ा कैसे खाया जाता है?

बिहार में चूड़ा खाने का तरीका बहुत सादा लेकिन परंपरिक होता है। आमतौर पर मोटा चूड़ा लिया जाता है, उसमें गाढ़ा देशी दही मिलाया जाता है और ऊपर से गुड़ या कभी- कभी केला डाला जाता है। मकर संक्रांति के दिन यह स्नान के बाद पहला भोजन माना जाता है और इसे हाथ से मिलाकर खाया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि हाथ का स्पर्श स्वाद और अपनापन दोनों बढ़ाता है। कहीं-कहीं तो इसमें कद्दूकस किया नारियल या थोड़ा दूध भी मिलाया जाता है। फिर परिवार के सभी लोग एक साथ धूप में बैठकर चूड़ा खाते हैं।

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Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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