Makar Sankranti Bhajan (मकर संक्रांति गाना): मकर संक्रांति का पावन त्योहार इस साल 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस पर्व को खिचड़ी और उत्तरायण’ भी कहते हैं। ये पर्व सूर्य उपासना से जुड़ा है। इस दिन लोग गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। साथ ही सूर्य के मंत्रों का जाप करते हैं। इस दिन विभिन्न नदियों के घाटों पर मेला भी लगता है। लोग इस दिन खिचड़ी का दान करने के साथ-साथ खुद भी इसका सेवन करते हैं। यहां जानिए मकर संक्रांति के लोकप्रिय भजन।
मकर संक्रांति भजन (Makar Sankranti Gana): गंगा सागर आया करो हर हर गांगे बुलाया करो
मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन स्वर्ग से देवता गंगा नदी में स्नान करने आते हैं। ऐसे में इस दिन गंगा मैया के इस भजन को खूब सुना जाता है।
सूर्य आरती (Surya Aarti)
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता।
षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता॥
जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
नभमंडल के वासी, ज्योति प्रकाशक देवा।
निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सबें सेवा॥
करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी।
निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी॥
हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
सूर्य चालीसा (Surya Chalisa)
मकर संक्रांति स्पेशल: सारे तीर्थ बार बार गंगा सागर एक बार
सूर्य देव मंत्र (Surya Dev Mantra)
-ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
-ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।
-ॐ सूर्याय नम: ।
-ॐ घृणि सूर्याय नम: ।
-ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
-ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
